Crude Oil Price: ओमान वार्ता से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, मिडिल ईस्ट में सप्लाई का डर हुआ कम; जानें ग्लोबल मार्केट का हाल
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में सोमवार सुबह नरमी देखी गई। अमेरिका और ईरान के बीच ओमान में परमाणु कार्यक्रम को लेकर हुई 'सकारात्मक बातचीत' के बाद वैश्विक बाजार ने राहत की सांस ली है। इस कूटनीतिक प्रगति से निवेशकों के मन में बैठा वह डर कम हुआ है, जिसमें आशंका जताई जा रही थी कि मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण तेल की सप्लाई बाधित हो सकती है।
सोमवार सुबह शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी क्रूड (WTI) दोनों के दाम करीब 0.70% तक फिसल गए।
ओमान की बातचीत ने बाजार को दी 'ऑक्सीजन'
शुक्रवार को ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच परोक्ष (Indirect) बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी। मार्केट एनालिस्टों का मानना है कि भले ही दोनों देशों के बीच मतभेद बरकरार हैं, लेकिन बातचीत की मेज पर बने रहने के वादे ने युद्ध के तात्कालिक खतरे को टाल दिया है।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स: 49 सेंट (0.72%) गिरकर $67.56 प्रति बैरल पर आ गया।
WTI क्रूड: 42 सेंट (0.66%) की गिरावट के साथ $63.13 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर टिकी दुनिया की नजर
कच्चे तेल के बाजार के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे संवेदनशील इलाका है। ओमान और ईरान के बीच स्थित इस संकरे समुद्री रास्ते से दुनिया की कुल तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) गुजरता है। यदि यहां तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है। पिछले हफ्ते तनाव कम होने की उम्मीद में दोनों बेंचमार्क 2% से अधिक गिरे थे, जो पिछले सात हफ्तों में पहली बड़ी गिरावट थी।
रूस-यूक्रेन युद्ध और भारत का बड़ा फैसला
तेल की कीमतों पर रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का भी गहरा असर पड़ रहा है।
यूरोपीय संघ का प्रस्ताव: यूरोपियन कमीशन ने रूसी समुद्री कच्चे तेल के एक्सपोर्ट को सपोर्ट करने वाली सभी सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया है।
भारत की रणनीति: कभी रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार रहे भारतीय रिफाइनर अब अप्रैल की डिलीवरी के लिए रूसी कच्चे तेल की खरीदारी से बच रहे हैं। सूत्रों का मानना है कि भारत का यह कदम वाशिंगटन के साथ भविष्य में होने वाले व्यापार समझौतों को मजबूती दे सकता है।
अमेरिका में बढ़ा तेल का उत्पादन
दूसरी ओर, अमेरिका में बढ़ती ऊर्जा कीमतों के कारण उत्पादन बढ़ाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। 'बेकर ह्यूजेस' की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों ने पिछले हफ्ते नवंबर के बाद पहली बार लगातार तीसरे सप्ताह तेल और प्राकृतिक गैस रिग्स की संख्या बढ़ाई है। अधिक रिग्स का मतलब है भविष्य में बाजार में तेल की अधिक आवक, जिससे कीमतें और स्थिर हो सकती हैं।