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April 15 2026 02:04 pm

US-Iran Talks: अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की महाबैठक! परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज की घेराबंदी पर फंसा पेंच, क्या टल जाएगा युद्ध?

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वाशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की नजरें अब अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली दूसरे दौर की कूटनीतिक वार्ता पर टिकी हैं। CNN News18 द्वारा एक्सेस किए गए एक्सक्लूसिव एजेंडे के मुताबिक, दोनों देशों के बीच मेज पर बातचीत तो हो रही है, लेकिन गहरे मतभेद अब भी बरकरार हैं। वाशिंगटन जहां एक 'ग्रैंड बार्गेन' (Grand Bargain) के जरिए ईरान पर लगाम कसना चाहता है, वहीं तेहरान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय शक्ति के साथ समझौता करने को तैयार नहीं है। इस बातचीत के नतीजे वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा तय करेंगे।

परमाणु कार्यक्रम: 20 साल बनाम 5 साल की डेडलॉक

बातचीत की सबसे बड़ी दीवार ईरान का यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) कार्यक्रम बना हुआ है। अमेरिका की सख्त शर्त है कि ईरान अगले 20 वर्षों तक अपने परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह रोक लगाए। इसके जवाब में ईरान ने केवल 5 साल का प्रस्ताव दिया है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधों में ढील तभी मिलेगी जब ईरान 'ठोस परमाणु कदम' उठाएगा, जबकि ईरान की जिद है कि बातचीत आगे बढ़ने से पहले उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: व्यापारिक मार्ग या युद्ध का मैदान?

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को लेकर भी ठन गई है। यह जलमार्ग अब मोलभाव का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। एजेंडे के अनुसार, इस जलसंधि से गुजरने वाले जहाजों के नियंत्रण और 'पैसेज फीस' (Passage Fees) को लेकर दोनों देशों के अपने-अपने दावे हैं। अगर यहां सहमति नहीं बनती है, तो वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल आना तय है, जिसका असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

हिजबुल्लाह और प्रॉक्सी नेटवर्क पर अमेरिका का दबाव

अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि ईरान अपने सहयोगी समूहों, विशेषकर हिजबुल्लाह और हुती विद्रोहियों को सैन्य सहायता देना तुरंत बंद करे। इसके पलटवार में ईरान ने लेबनान पर इजरायली हमलों को रोकने के लिए अमेरिका से ठोस सुरक्षा गारंटी मांगी है। इधर, लेबनान में हिजबुल्लाह के कड़े रुख ने आग में घी डालने का काम किया है। हिजबुल्लाह नेता वाफिक सफा ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अमेरिका-इजरायल वार्ता के किसी भी ऐसे नतीजे को स्वीकार नहीं करेंगे जो उनके अस्तित्व के खिलाफ हो।

मिसाइल प्रोग्राम और मुआवजे की मांग ने बढ़ाई तल्खी

परमाणु कार्यक्रम के अलावा, अमेरिका ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर भी कड़े प्रतिबंध चाहता है। वहीं, ईरान ने पिछले कुछ वर्षों में प्रतिबंधों के कारण हुए भारी आर्थिक नुकसान के लिए अमेरिका से मुआवजे की मांग कर दी है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की निगरानी में एक स्थायी ढांचा बनाने पर भी चर्चा हो रही है, लेकिन इजरायल और लेबनान के बीच चल रहे युद्ध ने इस कूटनीतिक रास्ते को बेहद पथरीला बना दिया है।