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April 16 2026 09:57 pm

गौतम गंभीर का नो-नॉनसेंस स्टाइल क्या BCCI के कड़े फैसलों से भारतीय क्रिकेट में आएगा बड़ा बदलाव?

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News India Live, Digital Desk : भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) अपने बेबाक अंदाज और सख्त अनुशासन के लिए जाने जाते हैं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गंभीर का यह 'नो-नॉनसेंस' स्टाइल (सख्ती भरा रवैया) भले ही कुछ खिलाड़ियों को रास न आ रहा हो, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) इसे एक सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है। बोर्ड को उम्मीद है कि गंभीर की यह कार्यशैली टीम इंडिया में जवाबदेही और प्रदर्शन के नए मानक स्थापित करेगी।

अनुशासन और प्रदर्शन पर गंभीर का जोर

गौतम गंभीर ने जब से टीम की कमान संभाली है, उन्होंने साफ कर दिया है कि टीम में जगह केवल प्रदर्शन और फिटनेस के आधार पर मिलेगी। सूत्रों के मुताबिक, ड्रेसिंग रूम में गंभीर ने एक ऐसी संस्कृति विकसित की है जहां 'नाम' से ज्यादा 'काम' को महत्व दिया जा रहा है। उनके कुछ फैसलों से कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों के बीच थोड़ी नाराजगी की खबरें भी आईं, लेकिन बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय में यह टीम के लिए फायदेमंद होगा।

BCCI क्यों है गंभीर के समर्थन में?

बीसीसीआई के लिए गंभीर का यह रुख एक राहत की तरह है। बोर्ड चाहता है कि टीम ट्रांजिशन (बदलाव) के दौर से मजबूती से गुजरे। विशेष रूप से सफेद गेंद के क्रिकेट में, जहां युवा खिलाड़ियों को मौका देने की जरूरत है, वहां गंभीर की स्पष्ट सोच मददगार साबित हो रही है। बोर्ड के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "गौतम का विजन एकदम क्लियर है। वह भविष्य की टीम बनाना चाहते हैं और इसके लिए अगर उन्हें कुछ कड़े फैसले लेने पड़ें, तो वह पीछे नहीं हटते।"

खिलाड़ियों की कार्यप्रणाली में बदलाव

गंभीर की कोचिंग में अभ्यास सत्रों (Practice Sessions) की तीव्रता बढ़ गई है। वह खुद नेट्स पर घंटों बिताते हैं और हर खिलाड़ी की तकनीकी कमियों पर बारीकी से काम करते हैं। उनके आने से टीम के फील्डिंग स्टैंडर्ड्स और रन-रनिंग में भी सुधार देखा जा रहा है। गंभीर का मानना है कि मैदान पर 'आक्रामकता' केवल बातों में नहीं, बल्कि खेल की शैली में दिखनी चाहिए।

क्या टीम इंडिया के लिए यह 'गोल्डन एरा' होगा?

गौतम गंभीर की कप्तानी में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने दो बार आईपीएल खिताब जीता और उनके मेंटर रहते हुए टीम ने 2024 में फिर से सफलता हासिल की। उनकी इसी 'विनिंग मानसिकता' को वह अब भारतीय राष्ट्रीय टीम में उतारना चाहते हैं। हालांकि, उनका सख्त रवैया आने वाले बड़े टूर्नामेंटों, जैसे कि आगामी विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी में कितना सफल होता है, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, बीसीसीआई पूरी तरह से अपने 'हेड मास्टर' कोच के पीछे खड़ा नजर आ रहा है।