सीरिया में प्रार्थना के वक्त मची चीख-पुकार मस्जिद ब्लास्ट के बाद सुलगे दंगे, अपनों के खून से फिर रंगी सड़कें
News India Live, Digital Desk : दुनिया के नक्शे पर सीरिया एक ऐसा देश है जिसने बीते सालों में शांति की तलाश में बहुत कुछ खोया है। लेकिन जो ताज़ा खबर आ रही है, वह किसी का भी दिल दहला सकती है। अक्सर हम उम्मीद करते हैं कि पूजा और इबादत की जगहें इंसान को सुकून देंगी, पर सीरिया में इसी सुकून की जगह पर अचानक 'मौत का शोर' सुनाई दिया।
एक धमाका और फिर फैलती नफरत
हुआ यूं कि जब लोग मस्जिद में नमाज अदा कर रहे थे, उसी वक्त एक भीषण धमाका हुआ। धमाका इतना जोरदार था कि पल भर में सब कुछ मलबे में तब्दील हो गया। लोग अभी इस सदमे से उबरे भी नहीं थे कि शहर में एक और भयानक चीज़ शुरू हो गई दंगे।
अक्सर होता यही है कि ऐसी हिंसक घटनाओं के पीछे कुछ शरारती तत्व भावनाओं को भड़काने का काम करते हैं। इस ब्लास्ट ने समुदायों के बीच पहले से चली आ रही दूरियों को और बढ़ा दिया। लोग सड़कों पर उतर आए और देखते ही देखते यह आक्रोश सांप्रदायिक दंगों में बदल गया। रिपोर्टों के मुताबिक, इस पूरी हिंसा में अब तक कई मासूमों ने अपनी जान गंवा दी है।
सालों का दर्द और गहरा हो गया
सीरिया वैसे ही युद्ध की मार झेल रहा है। ऐसे में मस्जिद को निशाना बनाना और फिर समुदायों के बीच नफरत फैलना यह बताता है कि शांति बहाल करना कितना चुनौतीपूर्ण है। सवाल यह है कि आखिर इस मासूम खून का जिम्मेदार कौन है? धमाके में जिन्होंने अपनों को खोया, उन्हें तो शायद ये भी नहीं पता होगा कि बाहर हो रहे दंगों का असली मकसद क्या है।
तनाव के साये में पूरा इलाका
घटना के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा है, लेकिन यह सन्नाटा सुकून वाला नहीं, बल्कि डर वाला है। सुरक्षा बल गश्त कर रहे हैं, पर टूटे हुए घरों और दिल के घावों को भरना इतना आसान नहीं होता। जब कोई देश अंदरूनी कलह से जूझ रहा हो, तो ऐसी घटनाएं उस जख्म पर नमक छिड़कने जैसा काम करती हैं।
सोशल मीडिया पर आ रही तस्वीरें वाकई विचलित करने वाली हैं। बच्चों और महिलाओं के चेहरे पर छाया खौफ साफ़ बताता है कि वहां हालात कितने गंभीर हैं। हम केवल यही प्रार्थना कर सकते हैं कि मानवता फिर से नफरत पर जीत हासिल करे और सीरिया की सड़कों पर दंगों की आग की जगह दोबारा सुकून नजर आए।