IPL में संजू-जड्डू की अदला-बदली? आखिर ये प्लेयर ट्रेडिंग होती क्या है, समझिए पूरा खेल
News India Live, Digital Desk: IPL ऑक्शन का समय जैसे-जैसे नज़दीक आता है, खिलाड़ियों को खरीदने-बेचने की चर्चाएं तेज़ हो जाती हैं. लेकिन ऑक्शन के अलावा भी एक और तरीक़ा है, जिससे टीमें अपने पसंदीदा खिलाड़ियों को शामिल कर सकती हैं. इसे कहते हैं 'प्लेयर ट्रेडिंग'. हाल ही में ऐसी ख़बरें उड़ीं कि राजस्थान रॉयल्स (RR) के कप्तान संजू सैमसन, चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) में जा सकते हैं और बदले में रवींद्र जडेजा राजस्थान की टीम में आ सकते हैं.
हालांकि ये अभी सिर्फ़ ख़बरें हैं, लेकिन इसने 'प्लेयर ट्रेडिंग' को फिर से चर्चा में ला दिया है. चलिए, आसान भाषा में समझते हैं कि आख़िर यह होता क्या है और टीमें ऐसा क्यों करती हैं.
क्या है IPL प्लेयर ट्रेडिंग?
सीधे शब्दों में कहें तो प्लेयर ट्रेडिंग का मतलब है दो टीमों के बीच खिलाड़ियों की अदला-बदली. यह सब IPL ऑक्शन से पहले एक ख़ास समय के दौरान होता है, जिसे 'ट्रेडिंग विंडो' कहते हैं. यह विंडो आमतौर पर IPL सीज़न ख़त्म होने के लगभग एक महीने बाद खुलती है और ऑक्शन से एक हफ़्ते पहले तक खुली रहती है.
कैसे होती है ये ट्रेडिंग?
खिलाड़ियों की ट्रेडिंग मुख्य रूप से दो तरीकों से होती है:
- खिलाड़ियों की सीधी अदला-बदली (Player-for-Player Swap): इसमें दो टीमें आपसी सहमति से एक-दूसरे के खिलाड़ियों को बदल लेती हैं. जैसे संजू और जडेजा वाली ख़बर में हो रहा है. अगर दोनों खिलाड़ियों की क़ीमत में अंतर होता है, तो एक टीम दूसरी टीम को अतिरिक्त पैसे भी देती है ताकि सौदा बराबर हो जाए.
- कैश में सौदा (All-Cash Deal): इसमें एक टीम किसी खिलाड़ी को खरीदने के लिए दूसरी टीम को पैसे देती है. इसमें कोई दूसरा खिलाड़ी शामिल नहीं होता. इसका सबसे बड़ा उदाहरण हार्दिक पंड्या की मुंबई इंडियंस में वापसी है, जहाँ मुंबई ने गुजरात टाइटंस को एक बड़ी रक़म देकर हार्दिक को ख़रीदा था.
क्या हैं इसके सबसे ज़रूरी नियम?
इस पूरी प्रक्रिया में कुछ नियम बहुत अहम होते हैं:
- खिलाड़ी की सहमति सबसे ज़रूरी: किसी भी खिलाड़ी को उसकी मर्ज़ी के बिना ट्रेड नहीं किया जा सकता. खिलाड़ी को एक सहमति फ़ॉर्म पर साइन करना होता है, तभी बात आगे बढ़ती है. अगर जडेजा राजस्थान नहीं जाना चाहेंगे, तो CSK उन्हें मजबूर नहीं कर सकती.
- BCCI की निगरानी: हर सौदे पर BCCI की नज़र रहती है और उसकी मंज़ूरी के बाद ही कोई भी ट्रेड पूरा माना जाता है. अगर बोर्ड को कुछ भी गड़बड़ लगती है तो वह सौदे को रद्द कर सकता है.
- सैलरी का गणित: अगर किसी खिलाड़ी को नई टीम में ज़्यादा सैलरी मिलती है, तो बढ़ी हुई रक़म का एक हिस्सा उस खिलाड़ी और पुरानी टीम के बीच बांटा जाता है.
टीमें ऐसा करती क्यों हैं?
ट्रेडिंग करने की मुख्य वजह टीम के संतुलन को बेहतर बनाना होता है. कई बार टीमों को ऑक्शन में अपनी ज़रूरत के खिलाड़ी नहीं मिल पाते या कोई खिलाड़ी उनकी टीम में ठीक से फ़िट नहीं हो पाता. ऐसे में ट्रेडिंग के ज़रिए टीमें ऑक्शन से पहले ही अपनी कमियों को दूर करने की कोशिश करती हैं. इससे उन्हें अपनी टीम को और मज़बूत करने का एक और मौक़ा मिल जाता है.
इसलिए अगली बार जब आप ऑक्शन से पहले किसी बड़े खिलाड़ी के दूसरी टीम में जाने की ख़बर सुनें, तो चौंकिएगा मत, क्योंकि यह IPL की रणनीति का ही एक दिलचस्प हिस्सा है.