संजीव बालियान का अपनी ही सरकार पर तीखा हमला जाट संसद में छलका दर्द, बोले सत्ता में बैठे लोग हमें दबाना चाहते हैं
News India Live, Digital Desk: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब पूर्व केंद्रीय मंत्री और कद्दावर नेता संजीव बालियान ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। राजधानी में आयोजित 'जाट संसद' के मंच से बालियान ने जो तेवर दिखाए, उसने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज कर दी है। बालियान ने दो टूक शब्दों में कहा कि समाज के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अगर हक की लड़ाई लड़नी पड़ी, तो वह पीछे नहीं हटेंगे।
अपनों पर ही बरसे बालियान: सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
जाट संसद को संबोधित करते हुए संजीव बालियान का दर्द साफ झलका। उन्होंने बिना नाम लिए सरकार के कुछ फैसलों और प्रशासन के रवैये पर उंगली उठाई। बालियान ने कहा कि पश्चिमी यूपी के किसानों और युवाओं के मुद्दों को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग सत्ता के नशे में इतने चूर हैं कि वे उस समाज को ही दबाने की कोशिश कर रहे हैं जिसने उन्हें फर्श से अर्श तक पहुँचाया है।
युवाओं के रोजगार और किसानों की अनदेखी पर घेरा
मंच से हुंकार भरते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज जाट समाज का युवा बेरोजगारी और उपेक्षा का शिकार है। उन्होंने कहा, "हम केवल वोट बैंक नहीं हैं, हमारी अपनी गरिमा और हक है।" बालियान ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने समय रहते अपनी नीतियों में सुधार नहीं किया और समाज के मान-सम्मान का ध्यान नहीं रखा, तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उनकी इस टिप्पणी को आगामी चुनावों से पहले एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
जाट राजनीति का नया अध्याय या बगावत के संकेत?
संजीव बालियान के इन तीखे तेवरों ने भाजपा के भीतर भी खलबली मचा दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बालियान का यह रुख केवल एक समाज की आवाज नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर उनकी बदलती स्थिति का भी संकेत है। अब देखना यह होगा कि बालियान के इन हमलों पर आलाकमान क्या रुख अपनाता है और क्या यह आक्रोश किसी बड़े राजनीतिक उलटफेर की पटकथा लिखेगा।