रसोई गैस सिलेंडर से मिली मुक्ति 6000 उपभोक्ताओं ने खुद लौटाए LPG कनेक्शन,अब इन इलाकों में केवल PNG की धमक
News India Live, Digital Desk: देश की राजधानी और आसपास के इलाकों में रसोई की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। केंद्र सरकार की 'क्लीन एनर्जी' मुहिम को बड़ी सफलता मिली है, जहां पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) की सुविधा मिलने के बाद लगभग 6000 उपभोक्ताओं ने स्वेच्छा से अपने पारंपरिक एलपीजी (LPG) कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस कदम की सराहना करते हुए इसे आधुनिक भारत की ओर एक बड़ा कदम बताया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन इलाकों में पीएनजी का जाल बिछ चुका है, वहां अब एलपीजी की निर्भरता को धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है।
क्यों बढ़ रहा है पीएनजी का क्रेज? सुविधाओं ने जीता दिल
पीएनजी के प्रति उपभोक्ताओं का बढ़ता रुझान केवल एक बदलाव नहीं, बल्कि सहूलियत की नई परिभाषा है। पीएनजी कनेक्शन होने से न तो सिलेंडर खत्म होने का डर रहता है और न ही बुकिंग के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। उपभोक्ताओं का कहना है कि पीएनजी न केवल सुरक्षित है बल्कि यह एलपीजी के मुकाबले सस्ती भी पड़ती है। इसी सुगमता को देखते हुए हजारों परिवारों ने अपने पुराने भारी-भरकम सिलेंडरों को टाटा-बाय-बाय कह दिया है।
सरकार की बड़ी योजना: एलपीजी सब्सिडी का बोझ होगा कम
सूत्रों के अनुसार, सरकार उन इलाकों में एलपीजी की सप्लाई रोकने या सीमित करने पर विचार कर रही है जहां पीएनजी का इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह तैयार हो चुका है। इससे न केवल लॉजिस्टिक्स का खर्च बचेगा, बल्कि सरकार पर पड़ने वाला सब्सिडी का बोझ भी कम होगा। जिन 6000 लोगों ने कनेक्शन छोड़े हैं, उन्हें विभाग की ओर से विशेष धन्यवाद पत्र भी दिया जा रहा है। यह पहल अन्य शहरी क्षेत्रों के लिए एक मॉडल के रूप में देखी जा रही है, जिससे 'डिजिटल और क्लीन इंडिया' को नई मजबूती मिलेगी।
सुरक्षा और बचत का डबल डोज है पाइप्ड गैस
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएनजी का प्रसार पर्यावरण के लिए भी वरदान है। सिलेंडर ले जाने वाले वाहनों से होने वाला प्रदूषण कम होगा और घरों में गैस लीकेज का खतरा भी न्यूनतम हो जाता है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले दो वर्षों में बड़े महानगरों के शत-प्रतिशत घरों को पाइपलाइन से जोड़ दिया जाए, ताकि सिलेंडर की होम डिलीवरी में होने वाली दिक्कतों से जनता को हमेशा के लिए निजात मिल सके।