एलन मस्क की नींद उड़ाने आ गए सैम ऑल्टमैन अब दिमाग पढ़ने की रेस में ChatGPT के बॉस की एंट्री
News India Live, Digital Desk :अगर आप टेक की खबरों पर नज़र रखते हैं, तो आपको पता होगा कि आजकल एलन मस्क (Elon Musk) और सैम ऑल्टमैन (Sam Altman) के बीच 'दोस्ताना' रिश्ते नहीं रहे हैं। पहले दोनों एक टीम में थे, फिर ChatGPT आया और रास्ते अलग हो गए। लेकिन अब लगता है कि सैम ऑल्टमैन, मस्क को उन्हीं के घर में घेरने की तैयारी कर रहे हैं।
खबर बड़ी दिलचस्प है। OpenAI (जिन्होंने ChatGPT बनाया है) अब एक नई स्टार्ट-अप कंपनी में पैसा लगा रहा है, जिसका नाम है Merge Labs। और जानते हैं यह कंपनी क्या करती है? ठीक वही काम जो एलन मस्क की कंपनी Neuralink कर रही है।
आइये, आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर यह 'Merge' है क्या और इससे मस्क क्यों टेंशन में आ सकते हैं।
क्या है ये BCI का मामला?
पहले समझिए कि लड़ाई किस चीज़ की है। बात हो रही है Brain-Computer Interface (BCI) की। सुनने में भारी लगता है, पर मतलब सीधा है"दिमाग को कंप्यूटर से जोड़ना।"
जरा सोचिए, आप सोफे पर बैठे हैं और बिना हाथ हिलाए, सिर्फ सोचकर अपने टीवी का चैनल बदल दें या किसी को मैसेज भेज दें। यही टेक्नोलॉजी BCI कहलाती है। अभी तक इस रेस में एलन मस्क की 'Neuralink' सबसे आगे दौड़ रही थी, जिसने इंसान के दिमाग में चिप लगाकर सबको चौंका दिया था।
Merge Labs: नया खिलाडी, नई तकनीक?
अब एंट्री हुई है 'Merge' की। यह कंपनी पूर्व गूगल इंजीनियरों द्वारा शुरू की गई है। हालांकि, Merge ने अपने पत्तों को पूरी तरह नहीं खोला है, लेकिन चर्चा है कि सैम ऑल्टमैन का साथ मिलने से यह न्यूरालिंक को कड़ी टक्कर देगी।
कहा जा रहा है कि Merge भी ऐसी तकनीक बना रही है जो इंसानी दिमाग और मशीनों के बीच बातचीत करा सकेगी। बड़ा सवाल यह है कि क्या इनकी तकनीक न्यूरालिंक से बेहतर होगी? क्या यह ज्यादा सुरक्षित होगी? क्योंकि न्यूरालिंक में सर्जरी और दिमाग में छेद करने की बात कई लोगों को डराती है। अगर Merge ने इसका कोई आसान 'तोड़' निकाल लिया, तो यह गेम चेंजर साबित होगा।
दोस्तों से जानी दुश्मन तक का सफर
यह सिर्फ टेक्नोलॉजी की नहीं, ईगो (Ego) की भी लड़ाई लगती है। एलन मस्क पहले ही कह चुके हैं कि वो OpenAI की दिशा से खुश नहीं हैं। मस्क का मानना है कि इंसान को मशीनों (AI) से पीछे नहीं रहना चाहिए, इसलिए हमें अपने दिमाग को अपग्रेड करना होगा (चिप लगाकर)। उधर, ऑल्टमैन AI को इंसान के लिए सबसे बड़ा साथी बनाना चाहते हैं। अब दोनों एक ही मैदान—'ह्यूमन ब्रेन'—में आमने-सामने हैं।
हमारा क्या फायदा-नुकसान?
एक आम इंसान के लिए यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा है। एक तरफ उम्मीद है कि लकवा (Paralysis) के मरीज फिर से चल सकें या बात कर सकें। दूसरी तरफ एक डर भी है कि क्या हमारे ख्यालों पर भी किसी और का कंट्रोल हो जाएगा?
फिलहाल तो यह शुरुआत है। एलन मस्क का 'न्यूरालिंक' या सैम ऑल्टमैन का ‘मर्ज’ जीत किसी की भी हो, भविष्य बहुत ही रोमांचक (और थोड़ा डरावना) होने वाला है। आप इस बारे में क्या सोचते हैं? क्या आप अपने दिमाग को कंप्यूटर से जोड़ना चाहेंगे?