बांग्लादेश से आई दुखद खबर, पूर्व पीएम खालिदा जिया का निधन, प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ इस तरह याद किया उनका साथ
News India Live, Digital Desk: बांग्लादेश की राजनीति की सबसे कद्दावर हस्तियों में से एक, पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया अब हमारे बीच नहीं रहीं। यह खबर सुनते ही दक्षिण एशिया के सियासी गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। खालिदा जिया का निधन सिर्फ बांग्लादेश के लिए ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश भारत के साथ उसके पुराने रिश्तों के लिहाज से भी एक बड़ी घटना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गहरा दुख
जैसे ही यह खबर सामने आई, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। पीएम मोदी ने कहा कि खालिदा जिया का जाना एक युग का अंत है। उन्होंने न केवल बांग्लादेश के विकास में अपनी अहम भूमिका निभाई, बल्कि एक समय में भारत और बांग्लादेश के बीच के रिश्तों की मजबूती के लिए भी प्रयास किए थे। पीएम मोदी ने उनके परिवार और बांग्लादेश की जनता के प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट की।
कैसा रहा खालिदा जिया का भारत के प्रति रुख?
खालिदा जिया ने दो बार बांग्लादेश की सत्ता संभाली। उनके कार्यकाल के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन जानकारों का मानना है कि उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर हमेशा अपनी प्रतिबद्धता जताई। पीएम मोदी ने अपने संदेश में विशेष रूप से इस बात का जिक्र किया कि खालिदा जिया के कार्यकाल में आपसी सहयोग को लेकर जो नीतियां बनीं, उन्हें आज भी याद किया जाता है।
रिश्तों को मजबूत करने में निभाई भूमिका
भले ही बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में बहुत बदलाव आए हों, लेकिन भारत हमेशा से अपने पड़ोसी देश के साथ बेहतर रिश्तों का पक्षधर रहा है। खालिदा जिया के निधन पर पीएम मोदी का शोक जताना यह दिखाता है कि भारत बांग्लादेश के हर नेता और वहां की जनता के संघर्ष का सम्मान करता है। जिया ने अपने दौर में ढाका और दिल्ली के बीच कूटनीतिक बातचीत के रास्तों को खुला रखने में अपनी सक्रियता दिखाई थी।
एक सशक्त महिला नेत्री की विदाई
खालिदा जिया केवल एक राजनेता नहीं थीं, बल्कि उन्होंने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को जिस तरह खड़ा किया, वह अपने आप में एक मिसाल है। वह बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं और दशकों तक वहां की सत्ता के केंद्र में रहीं। आज उनके जाने पर भारत के तमाम वरिष्ठ राजनेताओं ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
खालिदा जिया की विरासत और भारत-बांग्लादेश दोस्ती के पन्नों में उनका नाम हमेशा एक प्रभावशाली नेता के तौर पर दर्ज रहेगा।