Russia-India Oil Trade: 'बुरा चाहने वालों' से रूस छिपाएगा भारत को दिए तेल के आंकड़े! अमेरिका की 30 दिन की छूट के बीच क्रेमलिन का बड़ा बयान

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नई दिल्ली/मास्को। रूस और भारत के बीच गहराते रणनीतिक रिश्तों ने एक बार फिर पश्चिमी देशों की पेशानी पर बल ला दिए हैं। रूस ने शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर यह घोषणा की है कि वह भारत को निर्यात किए जा रहे कच्चे तेल (Crude Oil) के सटीक आंकड़े सार्वजनिक नहीं करेगा। रूसी राष्ट्रपति कार्यालय 'क्रेमलिन' ने इसके पीछे 'बुरा चाहने वालों' (Ill-wishers) की सक्रियता का हवाला दिया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मिडिल-ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है और अमेरिका ने मजबूरी में भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की विशेष छूट दी है।

क्रेमलिन का 'सीक्रेट' प्लान: क्यों छिपाए जा रहे आंकड़े?

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने साफ किया कि रूस अपने सबसे भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार भारत के साथ तेल सौदों को गोपनीय रखना चाहता है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट द्वारा भारतीय रिफाइनरियों को दी गई 30 दिनों की अस्थायी छूट के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरेगा। पेसकोव ने इन कयासों पर विराम लगाते हुए कहा, "हम साफ वजहों से मात्रा का कोई आंकड़ा नहीं देने जा रहे हैं। दुनिया में बहुत से लोग हैं जो इस सहयोग को बिगाड़ना चाहते हैं।"

2.2 करोड़ बैरल प्रति सप्ताह: रूस की मेगा सप्लाई क्षमता

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रूस महज एक सप्ताह के भीतर भारत को 2.2 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति करने की क्षमता रखता है। हाल ही में रूसी सरकारी टीवी पर जारी एक मानचित्र ने वैश्विक सनसनी मचा दी थी, जिसमें दर्जनों रूसी टैंकरों को अरब सागर से बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ते हुए दिखाया गया था। ये टैंकर भारत के पूर्वी तट पर स्थित रिफाइनरियों की ओर जा रहे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) संकट और भारत की रणनीति

पश्चिम एशिया में ईरान-इजराइल युद्ध के कारण दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई लाइन, 'होर्मुज जलडमरूमध्य', लगभग बंद हो चुकी है। वैश्विक तेल आपूर्ति का 20 प्रतिशत हिस्सा यहीं से गुजरता है। ईरान द्वारा इस मार्ग को बाधित किए जाने के बाद दुनिया भर में तेल संकट गहरा गया है।

रूस का स्टैंड: उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने स्पष्ट किया कि रूस भारत और चीन की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

अमेरिका की मजबूरी: पूर्व में रूस से तेल न खरीदने की शर्त रखने वाले अमेरिका ने अब भारतीय रिफाइनरियों को रियायत दी है, ताकि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को काबू में रखा जा सके।

भारत के लिए रूस क्यों बना 'संकटमोचक'?

सस्ता तेल: पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस भारत को आकर्षक छूट पर कच्चा तेल मुहैया करा रहा है।

ऊर्जा सुरक्षा: खाड़ी देशों में युद्ध के कारण भारत की निर्भरता अब रूस पर बढ़ रही है, जिससे घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।

शिपिंग रूट: बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के जरिए रूस-भारत के बीच नया सप्लाई कॉरिडोर विकसित हो रहा है।