ईरान में तख्तापलट की सुगबुगाहट शहजादे रेजा पहलवी का बड़ा दावा जनता ने थामने को कहा है देश की कमान

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News India Live, Digital Desk : ईरान में दशकों से चले आ रहे कट्टरपंथी शासन की नींव हिलती नजर आ रही है। हालिया सैन्य हमलों और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबरों के बीच, ईरान के निर्वासित शहजादे रेजा पहलवी (Reza Pahlavi) ने एक बड़ा बयान देकर वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। पहलवी ने दावा किया है कि ईरान की जनता ने उनसे इस कठिन समय में देश का नेतृत्व करने और एक लोकतांत्रिक बदलाव (Transition) लाने की अपील की है।

क्या ईरान में फिर लौटेगा 'पहलवी' युग?

ईरान के आखिरी शाह के बेटे रेजा पहलवी ने वाशिंगटन पोस्ट में लिखे एक लेख और हालिया संबोधनों में स्पष्ट किया है कि वे ईरान को एक 'धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक' राष्ट्र बनाने के लिए तैयार हैं।

जनता का आह्वान: पहलवी के अनुसार, ईरान के भीतर से आम नागरिक और प्रदर्शनकारी उन्हें पत्र और संदेश भेज रहे हैं कि वे आगे आएं और 'इस्लामिक रिपब्लिक' के पतन के बाद देश को संभालें।

संक्रमणकालीन सरकार: उन्होंने एक 'ट्रांजिशनल गवर्नमेंट' (अंतरिम सरकार) का खाका पेश किया है, जिसका मुख्य काम एक नया संविधान बनाना और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में निष्पक्ष चुनाव कराना होगा।

“ईरान को इराक नहीं बनने देंगे” पहलवी का संकल्प

शहजादे ने अमेरिका और पश्चिमी देशों को आश्वस्त किया है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन के बाद इराक जैसी अराजकता (Power Vacuum) पैदा नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने 'ईरान प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट' नाम का एक रोडमैप तैयार किया है, जिसमें प्रशासनिक ढांचे को सुरक्षित रखते हुए धीरे-धीरे बदलाव लाने की योजना है। उनका मानना है कि ईरान की सेना और नौकरशाही का एक बड़ा हिस्सा भी अब बदलाव चाहता है और वे उनके साथ सहयोग करेंगे।

इजरायल के साथ रिश्तों पर बड़ा बयान

पहलवी ने एक ऐसी बात कही है जो पूरे मिडिल ईस्ट की राजनीति को बदल सकती है। उन्होंने कहा कि नई लोकतांत्रिक ईरानी सरकार तुरंत इजरायल के साथ संबंध स्थापित करेगी। यह कदम उस 47 साल पुरानी दुश्मनी को खत्म कर देगा जिसने पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंके रखा है। उनके इस बयान को अमेरिका और इजरायल में बड़े 'गेम-चेंजर' के रूप में देखा जा रहा है।

क्या हैं चुनौतियां?

भले ही सड़कों पर 'बाप-बेटे' (शाह और उनके बेटे) के समर्थन में नारे लग रहे हों, लेकिन राह इतनी आसान नहीं है:

IRGC की ताकत: ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) अभी भी एक ताकतवर हथियारबंद बल है। क्या वे बिना लड़े आत्मसमर्पण करेंगे?

विपक्षी गुट: मुजाहिदीन-ए-खल्क (MEK) जैसे अन्य विपक्षी गुट भी सत्ता में हिस्सेदारी चाहते हैं, जिससे आंतरिक संघर्ष का खतरा है।

वैधता का सवाल: 40 साल से ज्यादा समय तक निर्वासन में रहने के बाद, क्या आज की ईरानी युवा पीढ़ी एक 'राजवंश' के वारिस को पूरी तरह स्वीकार करेगी?