रायगढ़ में अडानी प्रोजेक्ट पर मचा बवाल, ग्रामीणों ने दी सीधी चेतावनी जान दे देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे
News India Live, Digital Desk: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में माहौल गरमाया हुआ है। यहां अडानी समूह द्वारा कोयला ढुलाई के लिए बनाए जा रहे रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट का स्थानीय ग्रामीण पुरजोर विरोध कर रहे हैं। गुस्साए ग्रामीणों ने एकजुट होकर साफ कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे, भले ही इसके लिए उन्हें अपनी जान ही क्यों न गंवानी पड़े। यह मामला अब प्रशासन और ग्रामीणों के बीच एक बड़े टकराव का रूप लेता जा रहा है।
क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा विवाद गारे पलमा सेक्टर-2 कोल ब्लॉक से जुड़ा है, जिसका संचालन अडानी समूह कर रहा है। इस खदान से कोयले को बाहर ले जाने के लिए कंपनी एक रेल कॉरिडोर बना रही है। इस कॉरिडोर के लिए आसपास के कई गांवों, जैसे- मिलूपारा, सराईपाली और तिलाईपाली के किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। प्रशासन ने इसी के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करते हुए ग्रामीणों को नोटिस जारी किए हैं, जिसके बाद से ही यह विरोध भड़क उठा है।
"अफसर आएं तो बंधक बना लेंगे"
किसानों का गुस्सा इस कदर बढ़ गया है कि उन्होंने प्रशासन को सीधी चेतावनी दे डाली है। ग्रामीणों ने ऐलान किया है कि अगर भूमि अधिग्रहण या सर्वे के लिए कोई भी अधिकारी उनके गांव में आया तो उसे बंधक बना लिया जाएगा। प्रभावित ग्रामीणों ने ग्राम सभा की बैठक बुलाकर यह फैसला लिया और कहा कि वे अडानी कंपनी के किसी भी काम को अपने इलाके में नहीं होने देंगे। उनका कहना है कि वे किसी भी मुआवजे के लालच में अपनी पुरखों की जमीन को छोड़ने वाले नहीं हैं।
आजीविका और पर्यावरण की चिंता
ग्रामीणों का विरोध सिर्फ जमीन से भावनात्मक लगाव तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी आजीविका और भविष्य की चिंता से भी जुड़ा है।
- खेती पर संकट: ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन ही उनकी रोजी-रोटी का एकमात्र जरिया है। अगर जमीन चली गई, तो वे और उनके बच्चे क्या खाएंगे?
- पर्यावरण का नुकसान: रेल कॉरिडोर बनने से इलाके का पर्यावरण प्रभावित होगा। पेड़ों की कटाई होगी और प्रदूषण बढ़ेगा, जिसका असर उनके स्वास्थ्य और जीवन पर पड़ेगा।
इससे पहले भी इसी प्रोजेक्ट के तहत तमनार क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को लेकर बड़ा विवाद हो चुका है, जिसके खिलाफ स्थानीय लोग और पर्यावरण कार्यकर्ता आवाज उठाते रहे हैं। अब भूमि अधिग्रहण के नोटिस ने इस आग में घी डालने का काम किया है। ग्रामीणों की इस एकजुटता और सख्त रुख को देखते हुए प्रशासन के लिए आगे की राह आसान नहीं होगी।