छपरा में BJP के किले को भेदने के लिए RJD का खेसारी दांव? समझें जातीय समीकरण का पूरा खेल
News India Live, Digital Desk: बिहार की सबसे हॉट सीटों में से एक सारण, जिसे हम छपरा के नाम से भी जानते हैं, में अगली सियासी जंग की बिसात बिछने लगी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी के इस अभेद्य किले में सेंध लगाने के लिए अब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) एक ऐसा दांव चलने की तैयारी में है, जो बिहार की राजनीति में भूचाल ला सकता है। खबर है कि RJD, भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव को सारण से अपना उम्मीदवार बना सकती है।
खेसारी की एंट्री की खबरों ने छपरा के सियासी समीकरणों को पूरी तरह गरमा दिया है। यह सिर्फ एक सेलिब्रिटी को मैदान में उतारने की रणनीति नहीं है, बल्कि इसके पीछे जातीय गणित का एक गहरा खेल छिपा है, जिसमें एक 'बागी' नेता भी अहम भूमिका निभा सकता है।
RJD को खेसारी से क्या उम्मीद है?
सारण लोकसभा क्षेत्र यादव और राजपूत बहुल माना जाता है, और यहीं पर पूरा सियासी खेल टिका है।
- यादव वोट बैंक पर पकड़: खेसारी लाल यादव, यादव समुदाय से आते हैं। RJD का मानना है कि खेसारी के आने से क्षेत्र के लगभग 4 लाख यादव वोटर पूरी तरह से पार्टी के पक्ष में एकजुट हो जाएंगे, जो RJD का कोर वोट बैंक भी है।
- स्टारडम का जादू: खेसारी लाल यादव सिर्फ एक जाति के नेता नहीं, बल्कि एक सुपरस्टार हैं जिनकी फैन फॉलोइंग युवाओं में हर वर्ग और जाति में है। RJD को उम्मीद है कि खेसारी का स्टारडम यादव वोटों के अलावा अन्य समुदायों, खासकर अति पिछड़ा (EBC) और युवाओं के वोटों को भी अपनी ओर खींचेगा।
कैसे काम करेगा जातीय समीकरण?
सारण का चुनावी गणित बहुत दिलचस्प है।
- यादव वोटर: लगभग 4 लाख। (RJD का सबसे बड़ा आधार)
- राजपूत वोटर: लगभग 3.5 लाख। (राजीव प्रताप रूडी के कारण BJP का मजबूत गढ़)
- वैश्य वोटर: लगभग 2.5 लाख। (परंपरागत रूप से BJP का वोटर माना जाता है)
- अन्य: इसके अलावा ब्राह्मण, भूमिहार और मुस्लिम मतदाताओं की भी अच्छी संख्या है, जो किसी भी चुनाव का रुख मोड़ सकते हैं।
अब तक, राजीव प्रताप रूडी राजपूत वोटों के सहारे और वैश्य वोटों के मजबूत समर्थन से यहां जीतते आए हैं। RJD का प्लान है कि अगर खेसारी यादव वोटों को एकमुश्त हासिल कर लें और उसमें मुस्लिम और EBC का वोट जुड़ जाए, तो मुकाबला बेहद कड़ा हो जाएगा।
BJP का 'खेल' बिगाड़ सकती हैं बागी नेता राखी गुप्ता
इस पूरे समीकरण में एक और बड़ा पेंच है- राखी गुप्ता। राखी गुप्ता, जो वैश्य समाज से आती हैं, BJP की बागी नेता हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़कर अपनी ताकत दिखाई थी। अगर अगले चुनाव में भी वह मैदान में उतरती हैं, तो BJP के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती हैं।
राखी गुप्ता, BJP के परंपरागत वैश्य वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी कर सकती हैं। अगर ऐसा होता है, तो BJP का वोट बंट जाएगा, जिसका सीधा फायदा RJD के उम्मीदवार को मिल सकता है। RJD की रणनीति यही है: एक तरफ खेसारी यादव-मुस्लिम-EBC समीकरण को मजबूत करें, और दूसरी तरफ राखी गुप्ता BJP के वोटों में कटौती करें।
तो रोहिणी आचार्य का क्या होगा?
इस सियासी गहमागहमी के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि RJD की मौजूदा सांसद और लालू प्रसाद यादव की बेटी डॉ. रोहिणी आचार्य का क्या होगा? RJD की तरफ से इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सियासी गलियारों में यह चर्चा है कि पिछले चुनाव के नतीजों और बदलते हुए जातीय समीकरण को देखते हुए पार्टी एक ऐसे चेहरे की तलाश में है जो राजीव प्रताप रूडी को उनके गढ़ में कड़ी टक्कर दे सके।
कुल मिलाकर, खेसारी लाल यादव के नाम की चर्चा ने छपरा की सियासत को बेहद दिलचस्प बना दिया है। अब देखना यह होगा कि RJD का यह 'सुपरस्टार' दांव कितना कामयाब होता है और क्या वह BJP के सबसे मजबूत किलों में से एक को भेद पाएगा या नहीं।