रांची वालों के लिए राहत की खबर, अब अपनों के इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा वेल्लोर या दिल्ली

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News India Live, Digital Desk: अक्सर जब घर में किसी को किडनी की गंभीर बीमारी होती है, तो सबसे पहले मन में यही ख्याल आता है कि इलाज के लिए वेल्लोर, दिल्ली या फिर चेन्नई कब जाना होगा। रांची और आसपास के जिलों के लिए यह एक कड़वी सच्चाई रही है कि यहाँ संसाधनों की कमी के चलते मरीजों को बड़े ऑपरेशन्स के लिए मजबूरन बाहर जाना पड़ता है। इससे न केवल आर्थिक बोझ बढ़ता है, बल्कि मरीज के परिवार की परेशानी भी दोगुनी हो जाती है।

लेकिन अब रांची की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक अच्छी खबर सामने आ रही है। राजधानी के दो बड़े अस्पतालों को जल्द ही 'किडनी ट्रांसप्लांट' शुरू करने का लाइसेंस मिलने वाला है।

आखिर क्यों ज़रूरी थी ये सुविधा?
झारखंड में हर साल सैकड़ों ऐसे मरीज सामने आते हैं जिन्हें ट्रांसप्लांट की सख्त ज़रूरत होती है। अब तक यहाँ सरकारी मेडिकल कॉलेज रिम्स (RIMS) ही इकलौता मुख्य सहारा था, जहाँ मरीजों की लंबी लाइन लगी रहती है। निजी अस्पतालों में यह सुविधा न होने के कारण जिनके पास थोड़ा बहुत पैसा है, वे दिल्ली या दक्षिण भारत का रुख कर लेते हैं। ऐसे में शहर के दो निजी अस्पतालों को मंजूरी मिलने से यह सेवा और भी सुलभ हो जाएगी।

प्रशासनिक प्रक्रिया और लाइसेंस का रास्ता
बताया जा रहा है कि संबंधित विभाग और स्वास्थ्य विभाग की ओर से जरूरी इंस्पेक्शन (जांच) का काम पूरा कर लिया गया है। किसी भी अस्पताल को ट्रांसप्लांट की अनुमति देने से पहले यह देखा जाता है कि उनके पास ज़रूरी उपकरण, एक्सपर्ट डॉक्टरों की टीम और पर्याप्त बैकअप है या नहीं। रांची के इन दो अस्पतालों ने मानकों को पूरा कर लिया है और कागजी प्रक्रिया अब अपने आखिरी दौर में है।

मरीजों को क्या होगा सीधा फायदा?

  • समय की बचत: ऑपरेशन के लिए अब वेल्लोर या दिल्ली जैसे शहरों की यात्रा करने की ज़रूरत नहीं होगी।
  • कम खर्च: बाहर रहने और आने-जाने का अतिरिक्त खर्च बचेगा, जिससे इलाज पॉकेट पर थोड़ा कम भारी पड़ेगा।
  • अपनों का साथ: घर के पास इलाज होने से मरीज की देखरेख और मानसिक सुकून भी बना रहता है, जो रिकवरी के लिए बहुत ज़रूरी है।

आगे क्या उम्मीद रखें?
राजधानी रांची में जिस तरह से मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार हो रहा है, उसे देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि झारखंड जल्द ही 'हेल्थ हब' के तौर पर अपनी पहचान बनाएगा। अगर सबकुछ ठीक रहा, तो अगले कुछ ही हफ्तों में यहाँ सफल किडनी ट्रांसप्लांट की खबरें सुनने को मिल सकती हैं। यह कदम सिर्फ शहर के लिए ही नहीं, बल्कि राज्य के ग्रामीण इलाकों से आने वाले गरीब मरीजों के लिए भी उम्मीद की एक बड़ी किरण है।