झारखंड में कुदरत का कोल्ड टॉर्चर माइनस 2 डिग्री पारा और ऑरेंज अलर्ट की पूरी कहानी

Post

News India Live, Digital Desk : झारखंड में इस वक्त जो ठंड पड़ रही है, उसे महसूस करने के लिए आंकड़ों की ज़रूरत नहीं है। अगर आप सुबह-सुबह रजाई से बाहर पैर निकाल रहे हैं, तो वह चुभन खुद बता रही है कि इस बार सर्दी ने अपनी हदें पार कर दी हैं। राज्य के कुछ इलाकों में तापमान माइनस 2 डिग्री (-2°C) तक गिर चुका है। यह महज़ खबर नहीं है, बल्कि उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो ठंड को हल्का समझ रहे थे।

आखिर इतनी ठंड क्यों?
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बर्फीली हवाएं अब झारखंड की सरहद में पूरी तरह दाखिल हो चुकी हैं। इसका सबसे ज्यादा असर उन खुले इलाकों और पहाड़ी क्षेत्रों में दिख रहा है जहाँ सूरज की तपिश पहुँचने से पहले ही हवाएं शरीर को सुन्न कर देती हैं। काँके और नेतरहाट जैसे इलाकों में तो सुबह घास के मैदानों पर ओस की बूंदें सफ़ेद चादर की तरह जमी हुई नज़र आ रही हैं।

क्या है 'ऑरेंज अलर्ट' का मतलब?
मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट (Orange Alert) जारी किया है। इसका आसान शब्दों में मतलब ये है कि अब केवल सावधानी काफी नहीं है, अब तैयारी की ज़रूरत है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बेवजह घर से बाहर न निकलें, खासकर देर रात और तड़के सुबह। ये अलर्ट तब जारी होता है जब मौसम जान-माल या सेहत के लिए खतरनाक स्थिति तक पहुँचने वाला होता है।

किस पर पड़ रही है सबसे ज्यादा गाज?

  • किसानों की चिंता: खेत में खड़ी फसलों के लिए पाला (Frost) जमना किसी मुसीबत से कम नहीं है। तापमान माइनस में जाने का मतलब है फसलों का नुकसान।
  • स्कूली बच्चे और बुज़ुर्ग: सबसे ज्यादा दिक्कत छोटे बच्चों और बुज़ुर्गों को हो रही है। सुबह के वक्त स्कूलों की टाइमिंग और ठंड के बीच सामंजस्य बिठाना अब माता-पिता के लिए बड़ी चुनौती है।
  • पशु-पक्षी: खुले में रहने वाले बेजुबान जानवर भी इस ठिठुरन की मार झेल रहे हैं।

संभल कर रहने की है ज़रूरत
इस समय अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ करना भारी पड़ सकता है। सर्दी सिर्फ जुकाम नहीं लाती, बल्कि जो लोग ब्लड प्रेशर या हृदय रोग से परेशान हैं, उनके लिए यह मौसम काफी संवेदनशील होता है। कोशिश करें कि भरपूर गर्म कपड़े पहनें, गुनगुने पानी का सेवन करें और जितना हो सके खुद को अंदरूनी तौर पर गर्म रखें।

झारखंड की इस कड़ाके की सर्दी ने साफ़ कर दिया है कि जनवरी का ये हफ्ता घर में सुरक्षित बैठने का ही है। अगले कुछ दिनों तक राहत के आसार थोड़े कम हैं, इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।