रेड या सोची-समझी स्क्रिप्ट? झारखंड हाईकोर्ट की इस एक टिप्पणी ने हिला दी पूरी रांची की सियासत
News India Live, Digital Desk : झारखंड में पिछले कुछ समय से 'कानूनी खींचतान' का जो दौर चल रहा है, वह अब एक नए मोड़ पर पहुँच गया है। हम सभी जानते हैं कि केंद्र की जांच एजेंसियों (जैसे ED) और राज्य सरकारों के बीच की कड़वाहट अक्सर खबरों में रहती है, लेकिन रांची में जो हुआ, उसने खुद माननीय झारखंड हाईकोर्ट को भी हैरान कर दिया।
दरअसल, मामला ईडी दफ्तर पर पुलिस की छापेमारी से जुड़ा है। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने एक ऐसी टिप्पणी की है, जिसे जानकर आप भी सोच में पड़ जाएंगे।
कोर्ट ने क्या कहा? (पहली नज़र में प्री-प्लांड)
हाईकोर्ट ने साफ-साफ कहा कि रांची पुलिस की यह छापेमारी पहली नज़र में 'प्री-प्लांड' यानी पहले से योजनाबद्ध नज़र आती है। कोर्ट का इशारा इस तरफ था कि पुलिस ने जिस हड़बड़ी में और जिस तरीके से रेड डाली, वो कोई रूटीन इन्वेस्टिगेशन का हिस्सा नहीं लग रही थी, बल्कि ऐसा लग रहा था कि मानो इसकी स्क्रिप्ट पहले से लिखी जा चुकी थी।
मामला शुरू कहाँ से हुआ?
आपको याद होगा कि राज्य में कुछ समय पहले पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी और ईडी की जांच को लेकर काफी बवाल मचा था। इसी दौरान एससी/एसटी (SC/ST Act) के तहत ईडी के कुछ अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई थी। इसी आधार पर रांची पुलिस जांच करने के लिए अचानक ईडी के रिजनल ऑफिस पहुँच गई थी।
हैरानी किस बात की है?
अदालत ने गौर किया कि जिस रफ्तार से पुलिस ने कदम उठाए और जैसे इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया, उसमें निष्पक्ष जांच की झलक कम और किसी ख़ास इरादे की झलक ज्यादा लग रही थी। हाईकोर्ट ने उन ईडी अफसरों को फिलहाल बड़ी राहत दे दी है जिनके खिलाफ ये सारा मामला चल रहा था।
शक्ति का संघर्ष या कानून का पालन?
आमतौर पर माना जाता है कि एजेंसियां अपना काम करें और पुलिस अपना, लेकिन जब दोनों आमने-सामने आ जाएं और कोर्ट को कहना पड़े कि "भैया, ये तो पहले से तय लग रहा है," तब आम जनता का भरोसा डगमगाने लगता है। इस मामले ने एक बार फिर झारखंड में राजनीति बनाम एजेंसी की जंग को हवा दे दी है।
हमारा नज़रिया
कानून की लड़ाई अपनी जगह है, लेकिन जब संवैधानिक संस्थान एक-दूसरे के काम में इस तरह की 'हस्तक्षेप' वाली स्थिति में पहुँचते हैं, तो मामला केवल कोर्ट का नहीं रहता। हाईकोर्ट की ये सख्त टिप्पणी रांची पुलिस के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। अब देखना ये है कि पुलिस इस पर क्या सफाई देती है।
आप इस पूरी खींचतान को कैसे देखते हैं? क्या आपको लगता है कि वाकई एजेंसियों को अपना काम करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, या राज्य सरकार अपनी शक्तियों का सही इस्तेमाल कर रही है? हमें कमेंट में ज़रूर बताएं।