Ranchi Water Crisis : स्वर्ण जयंती नगर के लोग पानी और सड़क के लिए सड़क पर उतरे, कहा अब आर पार की लड़ाई होगी
News India Live, Digital Desk : अक्सर हम कॉलोनियों के नाम सुनकर सोचते हैं कि "वाह, स्वर्ण जयंती नगर! यहाँ तो सबकुछ 'गोल्ड क्लास' होगा।" लेकिन रांची के इस इलाके की हकीकत नाम के बिल्कुल उलट है। यहाँ के लोग 'सोने' की चमक नहीं, बल्कि दो वक्त के साफ़ पानी (Clean Water) और चलने लायक सड़क (Roads) के लिए तरस रहे हैं।
काफी समय से अपनी मांगों को लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद, अब स्वर्ण जयंती नगर के निवासियों के सब्र का बांध टूट गया है। मूलभूत सुविधाएं न मिलने से नाराज लोगों ने एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद की है और प्रशासन को नींद से जगाने की कोशिश की है।
क्या है समस्या? (The Ground Reality)
कहने को तो यह राजधानी रांची का हिस्सा है, लेकिन यहाँ के हालात किसी पिछड़े गांव से भी बदतर बताए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी मुसीबत पेयजल संकट है। नलों में पानी नहीं आता, और अगर आता भी है तो इतना गंदा कि पीया नहीं जा सकता। टैंकरों के भरोसे कब तक गृहस्थी चले?
दूसरी बड़ी आफत यहाँ की जर्जर सड़कें हैं। सड़कों पर इतने गड्ढे हैं कि यह पता नहीं चलता कि गड्ढे में सड़क है या सड़क में गड्ढा। बरसात में तो हालात ऐसे हो जाते हैं कि घर से निकलना मुहाल हो जाता है। न कोई ड्रेनेज सिस्टम (Drainage System) है, न सफाई। नाली का गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है।
"टैक्स लेते हो तो सुविधा क्यों नहीं?"
प्रदर्शन कर रहे लोगों के चेहरे पर गुस्सा साफ़ दिख रहा था। उनका एक ही सवाल है—हम होल्डिंग टैक्स (Holding Tax) देते हैं, बिजली बिल भरते हैं, सरकार के सारे नियमों का पालन करते हैं, फिर हमारे साथ ऐसा सौतेला व्यवहार क्यों?
निवासियों ने बताया कि पिछले कई सालों से उन्हें सिर्फ़ "आश्वासन" की गोली दी जा रही है। नेता आते हैं, वादे करते हैं, वोट लेते हैं और गायब हो जाते हैं। नगर निगम (Municipal Corporation) की फाइलों में शायद यह इलाका "विकसित" होगा, लेकिन जमीन पर लोग नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।
अब नहीं झुकेंगे
थक-हारकर अब लोगों ने तय किया है कि वो चुप नहीं बैठेंगे। समिति के लोगों ने साफ़ चेतावनी दी है कि अगर उनकी सड़क, पानी और नाली की समस्या जल्द दूर नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज होगा। कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया कि अगर काम नहीं हुआ, तो आने वाले चुनावों में वो "वोट का बहिष्कार" भी कर सकते हैं।
यह कहानी सिर्फ स्वर्ण जयंती नगर की नहीं है, बल्कि हमारे शहरी विकास के खोखले दावों की पोल खोलती है। क्या प्रशासन इन लोगों की गुहार सुनेगा या फिर उन्हें एक और बार सिर्फ़ भरोसे के सहारे छोड़ दिया जाएगा?
अब बर्दाश्त नहीं होगा! रांची के इस पॉश इलाके के लोगों ने खोला मोर्चा, प्रशासन को दी सीधी चेतावनी