राज्यसभा चुनाव और भारत रत्न का पेच, जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने क्यों बढ़ा ली केसी त्यागी की मांग से दूरी?

Post

News India Live, Digital Desk: कहते हैं कि राजनीति में किसी भी बात को कहने से ज़्यादा ज़रूरी होता है यह देखना कि वह बात 'कब' कही जा रही है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को "भारत रत्न" देने की मांग ने इन दिनों गलियारों में खूब चर्चा बटोरी है। लेकिन इस बार चर्चा मांग से ज़्यादा इस बात की हो रही है कि खुद जेडीयू (JDU) के अंदर ही इस मुद्दे पर दो फाड़ नज़र आ रहे हैं।

पूरा वाकया क्या है?
हाल ही में पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने सार्वजनिक तौर पर यह मांग उठाई कि नीतीश कुमार को उनके बेमिसाल काम के लिए देश का सर्वोच्च सम्मान यानी 'भारत रत्न' मिलना चाहिए। लेकिन, जैसे ही यह मांग सुर्ख़ियों में आई, जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन का एक अलग ही बयान सामने आ गया। उन्होंने साफ़ किया कि यह मांग पार्टी की आधिकारिक लाइन नहीं हो सकती और फिलहाल सारा ध्यान आगामी रणनीतियों पर है।

राज्यसभा चुनाव और बढ़ता सस्पेंस
जानकार मान रहे हैं कि राजीव रंजन की इस 'खामोशी' या 'सफ़ाई' के पीछे एक बड़ी वजह है—राज्यसभा चुनाव। बिहार की सियासत में इन दिनों सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों को लेकर वैसे ही काफी माथापच्ची चल रही है। ऐसे में 'भारत रत्न' जैसे संवेदनशील और बड़े मुद्दे को उठाना शायद पार्टी के एक धड़े को 'गलत टाइमिंग' लग रहा है। उन्हें लग रहा है कि कहीं इस मांग को बीजेपी पर दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर न देखा जाए, जिससे रिश्तों में कड़वाहट आ सकती है।

राजीव रंजन ने क्यों पल्ला झाड़ा?
राजीव रंजन का कहना है कि केसी त्यागी एक बहुत अनुभवी नेता हैं और उनके अपने निजी विचार हो सकते हैं, लेकिन जब तक पार्टी आलाकमान इस पर कोई फैसला नहीं लेता, तब तक इसे पूरी जेडीयू की मांग कहना जल्दबाज़ी होगी। उनका ये रुख बताता है कि पार्टी फिलहाल किसी भी ऐसे विवाद से बचना चाहती है जो राज्यसभा की बिसात पर उनके कदमों को डगमगा दे।

क्या कहती है अंदरूनी खबर?
राजनीति को करीब से देखने वालों का मानना है कि जेडीयू फिलहाल वेट-एंड-वॉच (Wait and Watch) की स्थिति में है। एक तरफ जहाँ केसी त्यागी नीतीश कुमार के 'कद' को देश भर में बढ़ाना चाहते हैं, वहीं राजीव रंजन जैसे नेता फिलहाल ज़मीनी समीकरणों और गठबंधन की मज़बूती को ज़्यादा तरजीह दे रहे हैं।