Rajasthan Pollution: लापरवाही या मुनाफाखोरी? 22 लोग बेहोश, सांसें उखड़ीं ,सीकर की फैक्ट्री में आखिर क्या जलाया गया था?

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News India Live, Digital Desk : आज हम सीकर (Sikar) की एक ऐसी घटना पर बात कर रहे हैं जिसने फिर साबित कर दिया है कि चंद रुपयों की बचत और मुनाफे के चक्कर में लोग दूसरों की जान की परवाह नहीं करते। हम अक्सर दिल्ली के प्रदूषण की बात करते हैं, लेकिन सीकर के रीको एरिया (RIICO Area) के पास जो हुआ, वह किसी त्रासदी से कम नहीं था।

सोचिए, आप अपने घर में सुकून से बैठे हों या सो रहे हों, और अचानक सांस लेना मुश्किल हो जाए। खांसते-खांसते आप बेहोश होने लगें। कुछ ऐसा ही डरावना मंजर सीकर में देखने को मिला, जहां जहरीले धुएं ने 22 लोगों को अस्पताल पहुंचा दिया।

आखिर हुआ क्या था?
मामला शहर के औद्योगिक क्षेत्र के पास का है। यहाँ कुछ अवैध या लापरवाही से चल रही यूनिट्स में अक्सर बेकार कपड़े (कतरन) और स्क्रैप को भट्ठी (Furnace) में जलाया जाता है। बताया जा रहा है कि कल रात भी कुछ ऐसा ही हुआ। एक बंद पड़ी या चालू भट्ठी में भारी मात्रा में वेस्ट कपड़े और प्लास्टिक जैसी चीजें जला दी गईं।

जैसे ही आग भड़की, चिमनी से काला और जहरीला धुआं (Toxic Smoke) निकलने लगा। हवा में फैलते ही यह जहर आस-पास की बस्तियों और घरों में घुस गया।

सांसों के लिए तड़पने लगे लोग
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले तो अजीब सी बदबू आई, जिसे लोगों ने इग्नोर किया। लेकिन थोड़ी ही देर में आंखों में जलन होने लगी और सांस लेना भारी हो गया। हालात इतने बिगड़ गए कि बच्चे और महिलाएं उल्टियां करने लगे और कई लोग बेहोश होकर गिर पड़े।
आनन-फानन में एम्बुलेंस और निजी गाड़ियों से लोगों को एसके अस्पताल (SK Hospital) ले जाया गया। इमरजेंसी वार्ड में अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि समय रहते इलाज मिल गया, वरना कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी।

कौन है इसका जिम्मेदार?
यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं थी, यह इंसान की बनाई हुई मुसीबत थी। प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Pollution Control Board) अक्सर दावे करते हैं कि ऐसी भट्ठियों पर लगाम है, लेकिन यह घटना बताती है कि जमीनी हकीकत कुछ और है। सवाल यह है कि शहर के बीचों-बीच जहरीला कचरा जलाने की हिम्मत किसकी हुई?

मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने जांच की बात कही है और कुछ भट्ठियों को सीज करने की खबरें भी आ रही हैं। लेकिन क्या यह काफी है? जिन 22 लोगों ने मौत को करीब से देखा, उनके डर की भरपाई कौन करेगा?

यह घटना हम सबको भी सोचने पर मजबूर करती है कि अपने आस-पास ऐसी अवैध गतिविधियों पर नज़र रखें, क्योंकि हवा किसी एक की नहीं होती, जहर फैलेगा तो सब पर असर होगा।