Rajasthan Congress : लिस्ट तो आ गई, पर जयपुर क्यों रह गया खाली? 3 जिलों में फंसा ऐसा पेंच कि दिल्ली तक मची खलबली!

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News India Live, Digital Desk :  राजस्थान की राजनीति में इंतज़ार करना अब एक आदत सी हो गई है। लंबे समय से कांग्रेस कार्यकर्ता जिस 'लिस्ट' का इंतज़ार कर रहे थे, वो आखिरकार आ ही गई। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने जिला अध्यक्षों की घोषणा कर दी है। लेकिन ठहरिए! अगर आप जयपुर, प्रतापगढ़ या राजसमंद से हैं, तो शायद आप अभी भी अपनी स्क्रीन रिफ्रेश कर रहे होंगे कि "भाई, हमारे वाले का नाम कहां है?"

जी हाँ, कांग्रेस ने लिस्ट तो जारी की, लेकिन इसमें एक बड़ा 'ट्विस्ट' छोड़ दिया। प्रदेश की राजधानी जयपुर (शहर और देहात), प्रतापगढ़ और राजसमंद जैसी महत्वपूर्ण जगहों पर अभी भी जिला अध्यक्षों की कुर्सियां खाली हैं।

आखिर राजधानी जयपुर को क्यों छोड़ा?

सबसे ज्यादा चर्चा जयपुर (Jaipur) को लेकर है। जयपुर न सिर्फ राजस्थान की राजधानी है, बल्कि सत्ता का पॉवर सेंटर भी है। यहाँ अध्यक्ष न होने का मतलब है—नाक के नीचे संगठन का 'मुखिया' न होना। सियासी गलियारों में चर्चा है कि जयपुर में गुटबाजी (Factionalism) इतनी हावी है कि किसी एक नाम पर सहमति बनाना "टेढ़ी खीर" साबित हो रहा है।

यहाँ दो बड़े खेमे—एक पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का और दूसरा सचिन पायलट का—अक्सर आमने-सामने रहते हैं। इसके अलावा कई स्थानीय विधायक और मंत्री भी अपने चहेते को अध्यक्ष बनवाना चाहते हैं। शायद इसी रस्साकशी (Tug of war) में जयपुर का फैसला "होल्ड" पर चला गया है।

प्रतापगढ़ और राजसमंद का क्या हाल है?

यही हाल मेवाड़ के प्रतापगढ़ और राजसमंद का भी है। राजसमंद बीजेपी का गढ़ माना जाता है, वहां सेंध लगाने के लिए कांग्रेस को एक मजबूत चेहरे की तलाश है। लेकिन वहां भी स्थानीय नेताओं के बीच 'तू-तू मैं-मैं' के चलते नाम फाइनल नहीं हो पा रहा है।

प्रतापगढ़ में भी जातीय समीकरण (Caste Equations) साधने के चक्कर में पेंच फंसा हुआ है। पार्टी आलाकमान कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहता जिससे लोकसभा चुनाव के बाद बने माहौल या आगामी स्थानीय चुनावों में नुकसान हो।

कार्यकर्ताओं के मन में क्या चल रहा है?

एक आम कार्यकर्ता के लिए यह स्थिति बड़ी अजीब है। जब तक 'सेनापति' तय नहीं होगा, सिपाही किसके आदेश पर काम करेंगे? इन 3 जिलों के कार्यकर्ता मायूस हैं। दबी जुबान में चर्चा है कि अगर बड़े नेता अपनी ईगो छोड़कर फैसला ले लेते, तो अब तक संगठन दौड़ने लगता।

गोविंद सिंह डोटासरा की परीक्षा

पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के लिए यह एक परीक्षा की घड़ी है। 25 जिलों में नियुक्तियां करके उन्होंने आधी जंग तो जीत ली है, लेकिन जयपुर जैसे "हाई प्रोफाइल" जिले का हल निकालना असली चुनौती है। क्या वे दिल्ली (आलाकमान) की मदद लेंगे या खुद स्थानीय नेताओं को एक जाजम पर बिठाएंगे? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।