Rajasthan : बच्चों की सेहत से खिलवाड़ कूड़े के ढेर में मिला मुख्यमंत्री च्यवनप्राश, भजनलाल सरकार ने बिठाई बड़ी जांच
News India Live, Digital Desk : राजस्थान में बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के लिए शुरू की गई 'मुख्यमंत्री च्यवनप्राश योजना' विवादों के घेरे में आ गई है। प्रदेश के कई हिस्सों से खबरें आ रही हैं कि बच्चों को खिलाए जाने के बजाय च्यवनप्राश के डिब्बे कबाड़ की दुकानों, लावारिस हालत में सड़क किनारे और कचरे के ढेर में फेंके हुए मिल रहे हैं। यह गंभीर लापरवाही तब सामने आई है जब सरकार इन योजनाओं पर करोड़ों रुपये का बजट खर्च कर रही है।
क्या है पूरा मामला? (The Misuse Case)
भजनलाल सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की इम्यूनिटी (प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाने के लिए विशेष च्यवनप्राश की आपूर्ति शुरू की थी। लेकिन हाल ही में सामने आए वीडियो और तस्वीरों में देखा गया है कि:
लावारिस स्टॉक: बड़ी संख्या में सीलबंद डिब्बे कचरे में फेंके गए हैं।
तारीख निकलने का डर: आशंका जताई जा रही है कि स्टॉक को समय पर वितरित नहीं किया गया, जिससे वे एक्सपायरी डेट के करीब पहुँच गए और पकड़े जाने के डर से उन्हें फेंक दिया गया।
बाजार में बिक्री: कुछ जगहों पर सरकारी सप्लाई का यह च्यवनप्राश स्थानीय दुकानों पर अवैध रूप से बिकने की भी शिकायतें मिली हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई और जांच
मामला मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक पहुँचने के बाद शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में खलबली मच गई है।
हाई-लेवल जांच के आदेश: सरकार ने संबंधित जिलों के शिक्षा अधिकारियों (DEO) से स्टॉक और वितरण की रिपोर्ट तलब की है।
दोषियों पर गिरेगी गाज: सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन स्कूलों या नोडल केंद्रों पर वितरण में कोताही बरती गई है, वहां के जिम्मेदार अधिकारियों और शिक्षकों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
विपक्ष का हमला
इस मामले को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार की मॉनिटरिंग सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुकी है और जनता के टैक्स का पैसा नाले में बहाया जा रहा है।