राहुल गांधी की बढ़ेंगी मुश्किलें केंद्र सरकार लाएगी विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव, किरेन रिजिजू ने बताया क्यों लिया यह फैसला

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News India Live, Digital Desk: संसद में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव एक नए स्तर पर पहुँच गया है। केंद्र सरकार ने कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव (Breach of Privilege Motion) लाने का निर्णय लिया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने और असंसदीय आचरण के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस कदम के बाद संसद की कार्यवाही में भारी हंगामे के आसार हैं।

क्यों लाया जा रहा है विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव?

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के अनुसार, राहुल गांधी ने हाल ही में सदन में दिए गए अपने भाषण के दौरान कई ऐसी बातें कहीं जो तथ्यों से परे थीं।

सदन को गुमराह करना: सरकार का आरोप है कि राहुल गांधी ने महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दों और सरकारी नीतियों पर गलत आंकड़े पेश किए।

तथ्यों की अनदेखी: रिजिजू ने कहा, "विपक्ष के नेता का पद जिम्मेदारी का होता है, लेकिन राहुल गांधी ने बिना किसी प्रमाण के गंभीर आरोप लगाए और बार-बार टोकने के बावजूद सदन की गरिमा का उल्लंघन किया।"

असंसदीय टिप्पणी: सरकार का दावा है कि राहुल के भाषण के कुछ अंश नियमों के विरुद्ध थे जिन्हें सदन की कार्यवाही से हटाने (Expunge) की मांग भी की गई थी।

क्या होता है 'विशेषाधिकार हनन' (Breach of Privilege)?

संसदीय नियमों के तहत, सांसदों को कुछ विशेष अधिकार और उन्मुक्तियाँ (Immunities) प्राप्त होती हैं।

उल्लंघन: जब कोई सदस्य इन अधिकारों का दुरुपयोग करता है या सदन की अवमानना करता है, तो उसके खिलाफ यह प्रस्ताव लाया जा सकता है।

जांच: प्रस्ताव पेश होने के बाद, अध्यक्ष इसे विशेषाधिकार समिति (Privilege Committee) को सौंप सकते हैं।

कार्रवाई: यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो सदस्य को सदन से निलंबित किया जा सकता है या उन्हें माफी मांगने के लिए कहा जा सकता है।

विपक्ष का पलटवार: "आवाज दबाने की कोशिश"

वहीं कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन 'INDIA' ने सरकार के इस कदम को लोकतंत्र पर हमला बताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार जनता के मुद्दों और बेरोजगारी-महंगाई जैसे सवालों से बचने के लिए राहुल गांधी को निशाना बना रही है। राहुल गांधी ने भी संकेत दिए हैं कि वे तथ्यों के साथ अपनी बात पर अडिग रहेंगे।

आगे क्या होगा?

अब सबकी नजरें लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) पर टिकी हैं। यदि अध्यक्ष इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेते हैं, तो राहुल गांधी को समिति के सामने अपना पक्ष रखना होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बजट सत्र के शेष दिनों में सरकार इस प्रस्ताव को पारित कराने में सफल रहती है।