राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर हमला तेज करते हुए 'वोट चोरी' अभियान शुरू किया
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर "वोट चोरी" के गंभीर आरोप लगाते हुए एक व्यापक अभियान "वोट चोरी" (Vote Chori) की शुरुआत की है। इस अभियान के अंतर्गत उन्होंने जनता से अपील की है कि वे चुनाव आयोग की जवाबदेही की मांग करें और डिजिटल मतदाता सूची जारी करने का दबाव बनाएं ताकि चुनाव पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष हो सकें।
राहुल गांधी का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर मतदाता धोखाधड़ी हुई है, जो लोकतंत्र की मूलभूत नींव "एक आदमी, एक वोट" को नुकसान पहुंचाती है। उन्होंने एक विशेष विधानसभा क्षेत्र (महाराष्ट्र के महादेवपुरा) में 1 लाख से अधिक नकली वोटों का खुलासा किया है, जिनसे भाजपा को लाभ हुआ। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग और भाजपा के बीच मिलीभगत से यह धोखाधड़ी संभव हुई।
इस अभियान के तहत एक आधिकारिक वेबसाइट (votechori.in) लॉन्च की गई है, जहां नागरिक इस मुद्दे पर अपनी सहमति दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा एक मिस्ड कॉल नंबर 9650003420 के जरिए भी लोग इस कैंपेन में शामिल हो सकते हैं। इस अभियान में शामिल होने वाले समर्थकों को डिजिटल सर्टिफिकेट भी जारी किया जाता है, जिसमें यह दर्शाया जाता है कि वे "वोट चोरी" के खिलाफ हैं और राहुल गांधी के डिजिटल वोटर रोल की मांग का समर्थन करते हैं।
कांग्रेस के शीर्ष नेता, जैसे कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, महासचिव के. सी. वेणुगोपाल और कोषाध्यक्ष अजय माकन, ने इस अभियान को बढ़ावा दिया है, और कई पार्टी कार्यकर्ता एवं समर्थक भी इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी से इस आरोप को साबित करने के लिए आधिकारिक दस्तावेज और शपथ पत्र मांगे हैं और उन पर फर्जी आरोप लगाने के लिए माफी मांगने को कहा है। चुनाव आयोग ने जोर देकर कहा है कि चुनाव पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हुए हैं और वे किसी भी पक्ष के दबाव में नहीं आएंगे।
यह विवाद देश की राजनीति में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां कांग्रेस इस अभियान के माध्यम से लोकतंत्र की रक्षा करने का दावा कर रही है, जबकि चुनाव आयोग और भाजपा इन आरोपों को बिना प्रमाण के लगाए गए बताकर खारिज कर रहे हैं।
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