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April 15 2026 03:36 pm

Purushottam Maas 2026 :17 मई से शुरू होगा अधिक मास, जानें इस पवित्र महीने की तारीख, नियम और श्रीहरि को प्रसन्न करने के उपाय

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News India Live, Digital Desk: हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाला है। इस साल अधिक मास (Adhik Maas) लग रहा है, जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास के नाम से भी जाना जाता है। इस अतिरिक्त महीने के कारण साल 2026 में 12 के बजाय 13 महीने होंगे। यह समय विशेष रूप से भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित होता है।

पुरुषोत्तम मास 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साल 2026 में अधिक मास ज्येष्ठ महीने में लग रहा है, जिसे 'अधिक ज्येष्ठ मास' कहा जाएगा।

शुरुआत: 17 मई 2026 (रविवार)

समापन: 15 जून 2026 (सोमवार)

क्यों खास है पुरुषोत्तम मास?

हिंदू कैलेंडर सूर्य और चंद्रमा की गणना पर आधारित है। चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है और सौर वर्ष 365 दिनों का। इन दोनों के बीच के 11 दिनों के अंतर को पाटने के लिए हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने इस महीने को अपना नाम 'पुरुषोत्तम' दिया है, जिससे इसका महत्व कई गुना बढ़ गया है।

इस महीने में क्या करें और क्या न करें?

क्या करें (नियम और उपाय):

विष्णु भक्ति: प्रतिदिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। विष्णु सहस्रनाम या श्रीमद्भागवत पुराण का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है।

दान-पुण्य: इस महीने में दीपदान, वस्त्र दान और अन्न दान का विशेष महत्व है। जरूरतमंदों को पीले फल या मिठाई का दान करें।

सत्विक भोजन: इस दौरान सादा और शाकाहारी भोजन करना चाहिए। संभव हो तो एक समय ही भोजन करें।

तीर्थ स्नान: पवित्र नदियों में स्नान करने से पिछले जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है।

क्या न करें (वर्जित कार्य):

अधिक मास में मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, जनेऊ संस्कार और तिलक आदि वर्जित होते हैं।

नए व्यवसाय की शुरुआत या नई संपत्ति (घर/गाड़ी) खरीदने से भी इस दौरान बचना चाहिए।

तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) का सेवन पूरी तरह त्याग देना चाहिए।

श्रीहरि की कृपा पाने के विशेष उपाय

तुलसी पूजा: रोज शाम को तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं और परिक्रमा करें।

गौ सेवा: अधिक मास में गाय को हरा चारा खिलाने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।

मालपुआ दान: इस महीने में कांसे के बर्तन में 33 मालपुआ रखकर दान करने की परंपरा है, जिससे आर्थिक तंगी दूर होती है।