Punjab Politics : बिक्रम मजीठिया की जमानत से पंजाब में सियासी घमासान SAD ने बताया बदले की राजनीति का अंत

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News India Live, Digital Desk:  सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी 2026 को शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को 700 करोड़ रुपये के आय से अधिक संपत्ति के मामले में नियमित जमानत दे दी है। मजीठिया 25 जून 2025 से पटियाला की नाभा जेल में बंद थे। इस फैसले के बाद पंजाब की राजनीति दो धड़ों में बंट गई है, जहाँ आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

अदालत का फैसला और मुख्य आधार

सुप्रीम कोर्ट की बेंच (जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता) ने मजीठिया को जमानत देते हुए कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ कीं:

हिरासत की अवधि: कोर्ट ने नोट किया कि मजीठिया पिछले 7 महीनों से जेल में हैं और मामले में 40,000 पन्नों की चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है।

NDPS मामले का संदर्भ: अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि मजीठिया को 2021 के ड्रग्स मामले में पहले ही जमानत मिल चुकी है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में बरकरार रखा था।

शर्तें: कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को मजीठिया पर सख्त शर्तें लगाने की छूट दी है, जिसमें पासपोर्ट जमा करना और जांच में सहयोग करना शामिल है।

सियासी घमासान: किसने क्या कहा?

1. शिरोमणि अकाली दल (SAD): "सत्य की जीत"

अकाली दल के नेताओं (दलजीत सिंह चीमा और अर्शदीप सिंह क्लेर) ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के लिए बड़ा झटका बताया है।

आरोप: अकाली दल का कहना है कि AAP सरकार ने मजीठिया की आवाज दबाने के लिए "फर्जी केस" गढ़ा था।

दावा: पार्टी ने कहा कि ड्रग्स केस में नाकाम रहने के बाद सरकार ने जानबूझकर आय से अधिक संपत्ति का मामला बनाया ताकि मजीठिया को जेल में रखा जा सके।

2. आम आदमी पार्टी (AAP): "अभी जंग बाकी है"

पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा और हरपाल सिंह चीमा ने स्पष्ट किया कि जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि मजीठिया निर्दोष साबित हो गए हैं।

बयान: "जमानत एक प्रक्रियात्मक अधिकार है। भ्रष्टाचार का केस अभी भी कायम है और हम इसे अदालत में तार्किक अंत तक ले जाएंगे।"

समीक्षा: सरकार इस आदेश का कानूनी अध्ययन कर रही है और संभवतः पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दाखिल करने पर विचार कर सकती है।

मजीठिया की रिहाई के मायने: पंजाब की राजनीति पर असर

बिक्रम मजीठिया की रिहाई ऐसे समय में हुई है जब पंजाब में स्थानीय निकाय चुनाव (Local Body Elections) और आगामी राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं।

अकाली दल को संजीवनी: मजीठिया पार्टी के सबसे मुखर चेहरों में से एक हैं। उनके बाहर आने से कार्यकर्ताओं के मनोबल में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है।

विपक्ष की गोलबंदी: जेल से बाहर आने के बाद मजीठिया ने बीजेपी और कांग्रेस के उन नेताओं का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने उनके मुश्किल समय में साथ दिया, जो भविष्य में नए 'गठबंधन' की ओर इशारा कर सकता है।

सरकार पर दबाव: ड्रग्स और भ्रष्टाचार के बड़े मामलों में सजा दिलाने का वादा कर सत्ता में आई 'आप' सरकार के लिए अदालती मोर्चे पर यह एक बड़ी चुनौती है।