मणिपुर में खत्म होगा राष्ट्रपति शासन? दिल्ली में NDA विधायकों का जमावड़ा, 12 फरवरी से पहले बन सकती है नई सरकार
News India Live, Digital Desk: जातीय हिंसा और प्रशासनिक अस्थिरता झेल रहे मणिपुर के लिए आने वाले 10 दिन बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं। राज्य में 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति शासन की एक साल की मियाद पूरी हो रही है। इसी समय सीमा के खत्म होने से पहले बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री पद के दावेदारों और एनडीए के सभी विधायकों को दिल्ली तलब किया है। आज शाम होने वाली इस बैठक में मणिपुर के भविष्य और नई सरकार के स्वरूप पर अंतिम मुहर लग सकती है।
दिल्ली में महामंथन: बीरेन सिंह समेत 35 से ज्यादा विधायक मौजूद
रविवार को ही पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह (N. Biren Singh), विधानसभा अध्यक्ष टी. सत्यव्रत और मणिपुर बीजेपी अध्यक्ष शारदा देवी के साथ बड़ी संख्या में विधायक दिल्ली पहुंच चुके हैं।
NDA की एकजुटता: इस बैठक में केवल बीजेपी ही नहीं, बल्कि गठबंधन सहयोगी NPP (नेशनल पीपुल्स पार्टी) और NPF (नागा पीपुल्स फ्रंट) के विधायक भी शामिल हो रहे हैं।
सकारात्मक संकेत: इंफाल एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए बीरेन सिंह ने कहा, "चूंकि सभी सहयोगियों को बुलाया गया है, इसलिए मुझे एक सकारात्मक परिणाम और जनता की सरकार (Popular Government) बनने की पूरी उम्मीद है।"
क्या फिर से बीरेन सिंह को मिलेगी कमान?
राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई सरकार का चेहरा कौन होगा। हालांकि बीरेन सिंह रेस में आगे दिख रहे हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व किसी 'नए चेहरे' या 'समावेशी नेतृत्व' पर भी विचार कर सकता है ताकि कुकी और मेइती समुदायों के बीच विश्वास की बहाली की जा सके।
कुकी विधायकों की भूमिका: खबर है कि कुकी-जो समुदाय के कुछ बीजेपी विधायक भी इस बैठक का हिस्सा बन सकते हैं, जो सरकार गठन के लिए एक अनिवार्य शर्त मानी जा रही है।
[Image showing Manipur NDA MLAs at Delhi Airport for the high-level meeting]
12 फरवरी की डेडलाइन और संवैधानिक स्थिति
मणिपुर में 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लगाया गया था और विधानसभा को 'निलंबित अवस्था' (Suspended Animation) में रखा गया था।
विस्तार या बहाली: यदि केंद्र सरकार राष्ट्रपति शासन को और आगे नहीं बढ़ाना चाहती, तो उसे 13 फरवरी से पहले नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
2027 तक का कार्यकाल: वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल मार्च 2027 तक है, इसलिए अभी चुनाव कराने के बजाय मौजूदा विधायकों के बीच से ही सरकार बनाने की कोशिश हो रही है।
शांति बहाली की चुनौती सबसे ऊपर
भले ही नई सरकार बनाने की तैयारी हो रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी चुनौतीपूर्ण है। पिछले साल मई से शुरू हुई हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं। नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती विस्थापित लोगों का पुनर्वास और दोनों समुदायों के बीच संवाद फिर से शुरू करना होगा।