जमशेदपुर की माटी पर राष्ट्रपति मुर्मू का बड़ा संदेश,विकास का पहिया अब हर गरीब की झोपड़ी तक पहुँचना चाहिए
News India Live, Digital Desk : जब भी देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू झारखंड की धरती पर कदम रखती हैं, तो माहौल में एक अलग ही अपनापन नज़र आता है। आख़िरकार इस माटी के साथ उनका रिश्ता बरसों पुराना है। हाल ही में जमशेदपुर के करनडीह में जब वह पहुँचीं, तो न सिर्फ़ उन्होंने पुरानी यादें ताज़ा कीं, बल्कि देश के सबसे पिछड़े और हाशिए पर खड़े समुदायों के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद भी जगा दी।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में बहुत ही गहरी और मर्मस्पर्शी बात कही। उन्होंने साफ़ किया कि अगर हमें वाकई में एक विकसित भारत बनाना है, तो हमें 'मिशन मोड' में काम करना होगा। यानी ऐसी रफ्तार और लगन, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ शहर के बीचों-बीच रहने वालों को ही नहीं, बल्कि पहाड़ों की चोटी और जंगलों के बीच बसी आख़िरी झोपड़ी तक पहुँचे।
क्या है 24,000 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट?
मुर्मू जी ने जिस बड़ी योजना का ज़िक्र किया, वह है 'पीएम-जनमन' (PM-JANMAN)। इसके लिए केंद्र सरकार ने लगभग 24,000 करोड़ रुपये का बजट रखा है। आप सोच सकते हैं कि यह राशि कितनी बड़ी है और यह कैसे लोगों की ज़िंदगी बदल सकती है। यह खास तौर पर उन जनजातीय समूहों (PVTGs) के लिए है, जो आज भी पक्की सड़क, शुद्ध पेयजल, बिजली और सही इलाज जैसी बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं।
करनडीह में उन्होंने बहुत सादगी के साथ समझाया कि कागज़ों पर बनी योजनाएँ तभी सफ़ल मानी जाएंगी जब गाँव का सबसे गरीब इंसान भी महसूस करे कि सरकार उसके साथ खड़ी है। राष्ट्रपति ने जोर दिया कि आदिवासियों के विकास का मतलब केवल पैसा बांटना नहीं है, बल्कि उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान के साथ मुख्यधारा में जोड़ना है।
साझा विरासत और पुरानी यादें
मुर्मू जी जब मंच से बोल रही थीं, तो उन्होंने आदिवासियों की जल, जंगल और ज़मीन से जुड़ी भावनाओं को बखूबी उकेरा। उनका कहना था कि आदिवासी समुदाय प्रकृति के रक्षक रहे हैं, और उनके विकास के लिए उनके सुझावों को भी महत्व दिया जाना चाहिए। वह झारखंड के लोगों के बीच सिर्फ़ एक राष्ट्रपति की तरह नहीं, बल्कि एक 'दीदी' और एक ऐसी शख्सियत के तौर पर नज़र आईं, जो ख़ुद इस संघर्ष का हिस्सा रही हैं।
सिर्फ़ बातें नहीं, ज़मीन पर दिखना चाहिए असर
राष्ट्रपति मुर्मू का यह दौरा साफ़ संकेत है कि आने वाले दिनों में जनजातीय समुदायों के लिए प्रशासन की तरफ से सख्ती और सक्रियता बढ़ेगी। जमशेदपुर जैसे शहर से यह संदेश देना बताता है कि अब योजनाओं की गति कछुआ चाल से नहीं बल्कि मिशन मोड में होगी।
हकीकत ये है कि करनडीह के लोगों के लिए वह पल गौरव का था जब उनकी अपनी माटी से निकली एक महिला आज सर्वोच्च पद पर बैठकर उनकी ही परेशानियों को दुनिया के सामने रख रही थीं। अब सबकी निगाहें इसी बात पर हैं कि ये 24,000 करोड़ की ताकत हमारे दूर-दराज़ के गाँवों की सूरत कितनी जल्दी बदल पाती है।