राजस्थान में उमर खालिद के नाम पर सियासी घमासान मुस्लिम संगठनों ने कांग्रेस को लिखा पत्र, राज्यसभा भेजने की उठी मांग
News India Live, Digital Desk: राजस्थान की राजनीति में एक नई और चौंकाने वाली मांग ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। प्रदेश के प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने कांग्रेस आलाकमान को पत्र लिखकर जेल में बंद पूर्व जेएनयू छात्र नेता और एक्टिविस्ट उमर खालिद को राज्यसभा भेजने की सिफारिश की है। संगठनों का तर्क है कि जून 2026 में खाली हो रही सीटों पर उमर खालिद को उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस 'समावेशी राजनीति' और 'नागरिक अधिकारों' के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का एक बड़ा संदेश दे सकती है।
मल्लिकार्जुन खरगे को सौंपा ज्ञापन: "प्रतिनिधित्व का हक दे कांग्रेस"
राजस्थान मुस्लिम एलायंस (RMA) और मुस्लिम प्रोग्रेसिव फोरम जैसे संगठनों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को संयुक्त ज्ञापन भेजा है। संगठनों का कहना है कि राजस्थान की आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी करीब 9-10 प्रतिशत है, लेकिन प्रदेश से संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में समुदाय का प्रतिनिधित्व शून्य है। 'राजस्थान मुस्लिम एलायंस' के प्रदेश अध्यक्ष मोहसिन राशिद टोंक ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2023 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों में मुस्लिम मतदाताओं ने कांग्रेस का भरपूर साथ दिया, लेकिन प्रतिनिधित्व के मामले में उन्हें दरकिनार किया गया।
उमर खालिद ही क्यों? संगठनों ने दिया यह तर्क
जब यह सवाल उठा कि जेल में बंद उमर खालिद को ही क्यों चुना जाए, तो मोहसिन राशिद ने कहा कि खालिद एक शिक्षित युवा नेता हैं जो 2020 से अल्पसंख्यक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों के लिए जेल में संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय संविधान के अनुसार, जब तक दोष सिद्ध न हो जाए, कोई भी व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है। संगठनों का मानना है कि उमर खालिद की राज्यसभा में मौजूदगी उन लोगों की आवाज बनेगी जिनकी आवाज दबाई जा रही है। उन्होंने कन्हैया कुमार का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस को जमीन पर संघर्ष करने वाले युवाओं को मुख्यधारा की राजनीति में लाना चाहिए।
राज्यसभा का गणित: कांग्रेस के पास एक सीट की उम्मीद
राजस्थान से जून 2026 में राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। मौजूदा विधानसभा के संख्या बल (बीजेपी 118, कांग्रेस 67 विधायक) के हिसाब से बीजेपी के खाते में दो और कांग्रेस के खाते में एक सीट जाने की प्रबल संभावना है। मुस्लिम संगठनों की मांग है कि इसी एक सीट पर उमर खालिद के नाम पर विचार किया जाए। संगठनों ने यह भी साफ किया कि उमर खालिद जैसे नेता के पाला बदलने या बीजेपी के दबाव में आने की संभावना 'जीरो' है, जो कांग्रेस के लिए एक भरोसेमंद विकल्प साबित हो सकते हैं।
बीजेपी का पलटवार: "भ्रष्टाचारियों और आरोपियों की शरणस्थली बनी कांग्रेस"
इस मांग के सामने आते ही बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस हमेशा से तुष्टीकरण की राजनीति करती रही है और अब वह दिल्ली दंगों के आरोपियों को संसद भेजने का सपना देख रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि कांग्रेस इस मांग पर विचार करती है, तो आगामी चुनावों में ध्रुवीकरण की राजनीति तेज हो सकती है, जो पार्टी के लिए एक 'दोधारी तलवार' साबित हो सकती है। फिलहाल कांग्रेस आलाकमान ने इस पर आधिकारिक तौर पर चुप्पी साध रखी है।