PNB-PayU Fraud: सावधान! डिजिटल भुगतान के नाम पर हो रही है लूट? पंजाब नेशनल बैंक और पेयू मनी पर लगे गंभीर आरोप, जानें क्या है पूरा मामला
लखनऊ/नई दिल्ली। देश के प्रमुख सरकारी बैंकों में शुमार पंजाब नेशनल बैंक (PNB) इस वक्त एक बड़े विवाद के घेरे में आ गया है। डिजिटल इंडिया के दौर में जहां सरकार पारदर्शिता की बात कर रही है, वहीं पीएनबी पर 'पेयू मनी' (PayU Money) जैसी भुगतान कंपनियों के साथ मिलकर डिजिटल धोखाधड़ी को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। पीड़ितों का दावा है कि बैंक और यह पेमेंट गेटवे कंपनी एक सोची-समझी रणनीति के तहत आम जनता की गाढ़ी कमाई पर सेंध लगा रहे हैं।
डिजिटल फ्रॉड का मकड़जाल और PNB की भूमिका
इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़ित जब अपनी शिकायत लेकर बैंक के पास पहुंच रहे हैं, तो उन्हें सहयोग के बजाय टालमटोल का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि पंजाब नेशनल बैंक ऐसी संदिग्ध कंपनियों के साथ पार्टनर बनकर कार्य कर रहा है, जो ग्राहकों के पैसे को असुरक्षित बनाती हैं। जब बैंक से इस संबंध में आधिकारिक जानकारी मांगी गई, तो अधिकारियों ने न केवल जवाब देने से मना कर दिया, बल्कि मामले को रफा-दफा करने की कोशिश भी की। यह सीधे तौर पर एक संगठित डिजिटल फ्रॉड की ओर इशारा करता है।
पेयू मनी (PayU Money) पर लगा धोखाधड़ी का आरोप
पेयू मनी, जो एक बड़ा पेमेंट गेटवे होने का दावा करती है, उसके सपोर्ट सिस्टम को लेकर भी बड़ा खुलासा हुआ है। ग्राहकों का कहना है कि कंपनी का न तो कोई वैध सपोर्ट मेल आईडी है और न ही कोई सक्रिय हेल्पलाइन नंबर। एक बार पैसा फंसने या फ्रॉड होने के बाद ग्राहकों के पास कंपनी से संपर्क करने का कोई रास्ता नहीं बचता। आरोप है कि इस कंपनी के पास केवल धोखाधड़ी की योजनाएं तैयार की जाती हैं और पीएनबी इसमें बराबर का हिस्सेदार बना हुआ है।
कार्रवाई के नाम पर बैंक की चुप्पी और मिलीभगत
हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े स्तर पर डिजिटल फ्रॉड की शिकायतों के बावजूद पंजाब नेशनल बैंक ने पेयू मनी के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की है। इसके विपरीत, बैंक उसे अपना बिजनेस पार्टनर बनाए हुए है। जानकारों का मानना है कि यह महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि ग्राहकों को लूटने के लिए तैयार की गई एक सोची-समझी 'डिजिटल प्लानिंग' का हिस्सा हो सकता है। बैंक की यह चुप्पी और टालमटोल की नीति ग्राहकों के भरोसे को चकनाचूर कर रही है।
साइबर सेल और आरबीआई लोकपाल तक पहुंच रहा मामला
डिजिटल धोखाधड़ी के इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। पीड़ितों ने अब सीधे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लोकपाल और साइबर सेल का दरवाजा खटखटाना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बैंक अपनी जिम्मेदारी से भागता है और किसी फ्रॉड कंपनी का साथ देता है, तो वह भी कानूनी रूप से उतना ही दोषी है। ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे ऐसे संदेहास्पद पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल करते समय बेहद सावधानी बरतें और किसी भी फ्रॉड की स्थिति में तुरंत 1930 पर रिपोर्ट दर्ज कराएं।