PM मोदी को जेल भेजो कल्पना इनामदार के बयान से सियासी भूचाल, लोक आंदोलन न्यास की मांग ने बढ़ाई दिल्ली की तपिश
News India Live, Digital Desk: लोक आंदोलन न्यास की अध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता कल्पना इनामदार के एक विवादित बयान ने देश की सियासत में उबाल ला दिया है। झारखंड के दौरे पर पहुंचीं कल्पना इनामदार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें जेल भेजने की मांग कर डाली है। इनामदार ने केंद्र सरकार की नीतियों और संवैधानिक संस्थाओं के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए कड़े कदम उठाना जरूरी है। उनके इस तीखे हमले के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में भारी रोष है, वहीं विपक्षी खेमे में इस बयान को लेकर दबी जुबान में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
केंद्र सरकार पर तानाशाही का आरोप, आंदोलन की चेतावनी
कल्पना इनामदार ने एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में आम जनता की आवाज को दबाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। इनामदार ने मांग की कि प्रधानमंत्री की जवाबदेही तय होनी चाहिए और अगर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उन्हें भी कानून के दायरे में लाकर सलाखों के पीछे भेजना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने अपनी कार्यशैली नहीं बदली, तो लोक आंदोलन न्यास देशव्यापी प्रदर्शन शुरू करेगा।
झारखंड की राजनीति में बयान के मायने
झारखंड में इस समय राजनीतिक माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है। ऐसे में कल्पना इनामदार का यह बयान राज्य की सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष के बीच नई जंग का कारण बन सकता है। स्थानीय भाजपा नेतृत्व ने इनामदार के बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे 'सस्ते प्रचार का जरिया' बताया है। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता के खिलाफ इस तरह की अभद्र टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।
कौन हैं कल्पना इनामदार और क्या है लोक आंदोलन न्यास?
कल्पना इनामदार लंबे समय से सामाजिक और राजनैतिक आंदोलनों से जुड़ी रही हैं। लोक आंदोलन न्यास के माध्यम से वे भ्रष्टाचार और जनहित के मुद्दों को उठाती रही हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी पर सीधे हमले ने उन्हें अचानक सुर्खियों के केंद्र में ला दिया है। जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले इस तरह के बयान ध्रुवीकरण की राजनीति को तेज कर सकते हैं। अब देखना यह है कि दिल्ली से लेकर रांची तक इस बयान की गूंज कितनी दूर तक जाती है और क्या पुलिस इस मामले में कोई स्वतः संज्ञान लेती है।