SSC की नई 'स्लाइडिंग फ्रेमवर्क' प्रणाली: अब खाली नहीं रहेंगे पद, अभ्यर्थियों को मिलेगा मनचाहा विभाग पाने का दूसरा मौका
नई दिल्ली: कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने भर्ती प्रक्रियाओं में एक क्रांतिकारी बदलाव करते हुए 'स्लाइडिंग फ्रेमवर्क सिस्टम' (Sliding Framework System) लागू कर दिया है। बुधवार को जारी विस्तृत दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह नई व्यवस्था उन पदों को भरने में मदद करेगी जो अभ्यर्थियों के ज्वाइन न करने या डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन (DV) में अनुपस्थित रहने के कारण खाली रह जाते थे।
इस प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यह है कि योग्य अभ्यर्थियों को एक ही परीक्षा चक्र (Exam Cycle) के भीतर अपने आवंटित पद को अपग्रेड करने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा।
क्या है 'स्लाइडिंग मैकेनिज्म' और यह कैसे काम करेगा?
वर्तमान व्यवस्था में एक बार विभाग आवंटित होने के बाद उसमें बदलाव की गुंजाइश नहीं होती थी, भले ही मेरिट में ऊपर के पद खाली रह जाएं। अब आयोग ने इसे दो चरणों में बांट दिया है:
प्रथम चरण (FRTA): सबसे पहले 'फर्स्ट राउंड टेंटेटिव एलोकेशन' (FRTA) होगा, जो मौजूदा नियमों के तहत मेरिट और वरीयता (Preference) के आधार पर किया जाएगा।
सत्यापन और विकल्प का चयन: आवंटन के बाद अभ्यर्थियों को क्षेत्रीय कार्यालय जाकर आधार आधारित बायोमीट्रिक सत्यापन कराना होगा। यहाँ उन्हें दो महत्वपूर्ण विकल्प दिए जाएंगे:
फिक्स (Fix): यदि अभ्यर्थी अपने आवंटित पद से संतुष्ट है, तो वह 'फिक्स' विकल्प चुनेगा। इसके बाद उसके आवंटन में कोई बदलाव नहीं होगा।
फ्लोट (Float): यदि अभ्यर्थी अपनी उच्च वरीयता (Higher Preference) वाला पद पाना चाहता है, तो वह 'फ्लोट' चुनेगा। यदि भविष्य में ऊपर के रैंक पर कोई पद खाली होता है, तो मेरिट के आधार पर उसे अपग्रेड कर दिया जाएगा।
महत्वपूर्ण चेतावनी: आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि 'फ्लोट' विकल्प चुनने वाले अभ्यर्थी को नया पद आवंटित हो जाता है, तो उसे वहां अनिवार्य रूप से ज्वाइन करना होगा। यदि वह ज्वाइन नहीं करता, तो उसका नया और पुराना दोनों आवंटन निरस्त (Cancel) कर दिए जाएंगे।
पोर्टल पर मिलेगी स्लाट बुकिंग की सुविधा
अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए SSC ने एक नया पोर्टल भी अपडेट किया है, जहाँ वे अपनी पसंद के अनुसार पहचान सत्यापन के लिए शहर, तिथि और शिफ्ट का चयन कर सकेंगे।
समय सीमा: सत्यापन के लिए प्रतिदिन चार स्लाट (सुबह 9:00, 11:00, दोपहर 2:00 और शाम 4:00 बजे) उपलब्ध होंगे।
नियम: स्लाट का आवंटन 'पहले आओ, पहले पाओ' (First Come, First Served) के आधार पर होगा।
सत्यापन प्रक्रिया: केंद्र पर अभ्यर्थी का लाइव फोटो, आधार बायोमीट्रिक और फिंगरप्रिंट मिलान किया जाएगा। किसी भी विसंगति की स्थिति में उम्मीदवारी तुरंत रद्द की जा सकती है।
क्यों पड़ी इस सिस्टम की जरूरत?
आयोग के विश्लेषण में सामने आया था कि अंतिम चयन के बाद भी कई अभ्यर्थी बेहतर अवसर मिलने या व्यक्तिगत कारणों से ज्वाइन नहीं करते थे। इससे वेटिंग लिस्ट न होने के कारण वे पद पूरे साल खाली रह जाते थे और अगले साल की वैकेंसी में जुड़ते थे। 'स्लाइडिंग फ्रेमवर्क' से अब उसी साल के मेरिट वाले छात्रों को उन खाली पदों पर शिफ्ट किया जा सकेगा, जिससे सरकारी विभागों में मैनपावर की कमी दूर होगी और अभ्यर्थियों का समय भी बचेगा।