पश्चिम एशिया संकट पर राज्यसभा में बोले PM मोदी, ईरान, इजरायल और अमेरिका से सीधे संपर्क में भारत
News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण संघर्ष और ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 24 मार्च 2026 को राज्यसभा को संबोधित किया। सोमवार को लोकसभा में दिए गए अपने बयान के अगले दिन, प्रधानमंत्री ने उच्च सदन में भारत की कूटनीतिक सक्रियता और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर देश को आश्वस्त किया। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत इस समय ईरान, इजरायल और अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व के साथ निरंतर संपर्क में है और भारत का एकमात्र लक्ष्य बातचीत (Dialogue) और कूटनीति (Diplomacy) के माध्यम से क्षेत्र में शांति बहाल करना है।
1. 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) पर भारत की कड़ी नजर
प्रधानमंत्री ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही में आ रही रुकावट पर गहरी चिंता व्यक्त की।
अस्वीकार्य हस्तक्षेप: पीएम ने दोटूक कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में कमर्शियल जहाजों पर हमला और आवाजाही में बाधा डालना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
आपूर्ति श्रृंखला: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों (कच्चा तेल और गैस) और फर्टिलाइजर की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी पक्षों से इस मार्ग को सुरक्षित और खुला रखने की बात कर रहा है।
2. "युद्ध किसी के हित में नहीं": पीएम का कूटनीतिक संदेश
प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में भारत के स्टैंड को स्पष्ट करते हुए तीन बड़ी बातें कहीं:
निरंतर संवाद: "मैंने खुद पश्चिम एशिया के अधिकांश राष्ट्राध्यक्षों से दो राउंड बात की है। हम खाड़ी के सभी देशों के साथ संपर्क में हैं ताकि तनाव को कम (De-escalation) किया जा सके।"
मानवीय पक्ष: पीएम ने कहा कि युद्ध में मासूमों की जान जाना और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले मानवता के खिलाफ हैं। भारत ने हमेशा शांति और संवाद का रास्ता सुझाया है।
भारतीयों की सुरक्षा: खाड़ी देशों में रह रहे करीब 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पीएम ने बताया कि अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं।
3. ऊर्जा संकट और आत्मनिर्भरता का आह्वान
युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ते तेल और गैस के दामों पर पीएम ने कहा कि यह स्थिति भारत के लिए भी चुनौतीपूर्ण है।
रणनीतिक भंडार: उन्होंने जानकारी दी कि भारत के पास पर्याप्त कच्चा तेल उपलब्ध है और सरकार ऊर्जा आपूर्ति में कोई कमी नहीं आने देगी।
संकल्प: पीएम ने सदन से अपील की कि इस विकट परिस्थिति में भारत की संसद से दुनिया को एकजुट और शांति का संदेश जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में भारत का 'आत्मनिर्भर' होना ही एकमात्र विकल्प है।
4. विपक्ष का पलटवार: राहुल गांधी ने साधा निशाना
प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद विपक्ष ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारत अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं में हाशिये पर चला गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार की विदेश नीति 'व्यक्तिगत' होकर रह गई है और इस गंभीर संकट पर तत्काल सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) बुलाई जानी चाहिए।
5. क्या है भारत की भावी रणनीति?
सरकार ने पश्चिम एशिया संकट से निपटने के लिए 7 अधिकार प्राप्त समूहों (Empowered Groups) का गठन किया है, जो कच्चे तेल की आपूर्ति, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा की निगरानी कर रहे हैं। 28 मार्च को जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन से पहले पीएम का यह बयान वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक धमक को दर्शाता है।