Piles Treatment : बवासीर के दर्द और ब्लीडिंग से हैं परेशान? कचनार की जड़ है रामबाण आयुर्वेदिक इलाज
News India Live, Digital Desk : आज के समय में खराब जीवनशैली और कब्ज की समस्या के कारण 'बवासीर' (Piles) एक आम लेकिन बेहद तकलीफदेह बीमारी बन गई है। जब एलोपैथिक दवाएं बेअसर होने लगती हैं, तब आयुर्वेद की प्राचीन जड़ी-बूटियां चमत्कारिक परिणाम दिखाती हैं। इन्हीं में से एक है कचनार (Kachnar)। कचनार के फूल और छाल ही नहीं, बल्कि इसकी जड़ बवासीर को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखती है।
बवासीर में क्यों फायदेमंद है कचनार की जड़?
आयुर्वेद के अनुसार, कचनार में 'कषाय' (Tannins) और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
सूजन कम करना: यह मलाशय के आसपास की नसों की सूजन को कम करती है।
ब्लीडिंग पर रोक: कचनार की जड़ के सेवन से खूनी बवासीर (Bleeding Piles) में रक्तस्राव तुरंत कम होने लगता है।
पाचन में सुधार: यह पेट को साफ रखने और कब्ज को दूर करने में मदद करती है, जो बवासीर का मुख्य कारण है।
कैसे करें कचनार की जड़ का इस्तेमाल? (Ayurvedic Remedy)
विशेषज्ञों के अनुसार, कचनार की जड़ का उपयोग निम्नलिखित तरीकों से किया जा सकता है:
जड़ का काढ़ा (Decoction): कचनार की सूखी जड़ को कूटकर पानी में तब तक उबालें जब तक पानी आधा न रह जाए। इस काढ़े को छानकर दिन में दो बार पीने से मसों के दर्द में आराम मिलता है।
पाउडर और शहद: कचनार की जड़ के चूर्ण को एक चम्मच शहद के साथ लेने से शरीर के दूषित तत्व बाहर निकलते हैं और बवासीर के घाव जल्दी भरते हैं।
कचनार गुग्गुल: बाजार में कचनार की जड़ से बनी 'कचनार गुग्गुल' टैबलेट्स भी उपलब्ध हैं, जो गांठ और सूजन को सुखाने में बेहद कारगर मानी जाती हैं।
इन बातों का रखें विशेष ख्याल
बवासीर के उपचार के दौरान केवल दवा काफी नहीं है, खान-पान में बदलाव भी जरूरी है:
फाइबर युक्त भोजन: अपनी डाइट में सलाद, दलिया और हरी सब्जियां शामिल करें।
भरपूर पानी: दिन भर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं ताकि मल त्याग में आसानी हो।
मसालेदार भोजन से तौबा: अधिक मिर्च-मसाले और बाहर के जंक फूड का सेवन बंद कर दें।
सावधानियां
कचनार की जड़ का प्रभाव काफी शक्तिशाली होता है। इसलिए, इसका सेवन शुरू करने से पहले किसी अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श जरूर लें, खासकर यदि आप गर्भवती हैं या किसी अन्य गंभीर बीमारी की दवा ले रहे हैं।