Ph.D. Admission Guide : अगर आपकी यूनिवर्सिटी ये 5 नियम फॉलो नहीं करती, तो संभल जाइये जानिये क्या कहते हैं नियम

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News India Live, Digital Desk: आजकल करियर में ऊंचाइयों को छूने के लिए पीएचडी (PhD) की डिग्री एक बड़ी जरूरत बन गई है। सरकारी विश्वविद्यालयों में सीटें कम होने के कारण बहुत से छात्र प्राइवेट यूनिवर्सिटी की तरफ रुख करते हैं। लेकिन यहीं पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है"क्या प्राइवेट यूनिवर्सिटी की यह डिग्री आगे जाकर सरकारी नौकरी या प्रमोशन में काम आएगी?"

जवाब है'हाँ', बिल्कुल आएगी, लेकिन शर्त यह है कि आपकी यूनिवर्सिटी ने यूजीसी (UGC) के सख्त नियमों का पालन किया हो। अगर आप भी पीएचडी करने की सोच रहे हैं, तो एडमिशन लेने से पहले इन बातों को ज़रूर चेक कर लें।

1. एंट्रेंस एग्जाम और मेरिट (सबका अधिकार नहीं)
कई लोग सोचते हैं कि पैसा दिया और एडमिशन हो गया। यूजीसी कहता है कि भले ही यूनिवर्सिटी प्राइवेट हो, उसे अपना खुद का 'एंट्रेंस टेस्ट' आयोजित करना होगा। अगर आपने नेट (NET/JRF) क्वालीफाई किया है, तो आपको टेस्ट से छूट मिल सकती है, लेकिन सीधा एडमिशन लेना नियम के खिलाफ है।

2. रेगुलर क्लास और कोर्स वर्क (शॉर्टकट नहीं चलेगा)
पीएचडी का मतलब सिर्फ रिसर्च पेपर जमा करना नहीं है। यूजीसी के नए नियमों के मुताबिक, कम से कम एक सेमेस्टर का 'कोर्स वर्क' करना अनिवार्य है। इसमें आपको रिसर्च के तौर-तरीकों के बारे में सिखाया जाता है। अगर कोई यूनिवर्सिटी आपसे कहे कि आपको कैंपस आने की जरूरत नहीं है और घर बैठे पीएचडी हो जाएगी, तो समझ जाइये कि आपकी डिग्री खतरे में है।

3. सुपरवाइजर (गाइड) कौन है?
यह एक सबसे जरूरी नियम है। आपकी रिसर्च का गाइड (Supervisor) उसी यूनिवर्सिटी का 'रेगुलर टीचर' होना चाहिए। आप बाहर के किसी व्यक्ति को मुख्य गाइड नहीं बना सकते (हाँ, को-गाइड के तौर पर बाहर का विशेषज्ञ हो सकता है)। अगर यूनिवर्सिटी ने गाइड बाहर से हायर किया है, तो वह डिग्री अवैध मानी जा सकती है।

4. डिस्टेंस मोड (दूरी बना कर रखें)
साफ सुन लीजिये—भारत में पीएचडी 'डिस्टेंस' यानी पत्राचार के माध्यम से करना पूरी तरह से प्रतिबंधित (Banned) है। पीएचडी हमेशा रेगुलर मोड में ही होनी चाहिए। हाँ, नौकरी करने वालों के लिए 'पार्ट-टाइम पीएचडी' का विकल्प ज़रूर है, लेकिन उसके लिए भी आपको एनओसी (NOC) लेनी होती है और कुछ क्लासेज अटेंड करनी पड़ती हैं।

5. यूनिवर्सिटी की मान्यता चेक करें
एडमिशन से पहले यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर लिस्ट चेक करें कि वह प्राइवेट यूनिवर्सिटी 'यूजीसी सेक्शन 2(f)' के तहत लिस्टेड है या नहीं। यह भी देखें कि पिछले कुछ सालों में उस यूनिवर्सिटी का रिसर्च ट्रैक रिकॉर्ड कैसा रहा है।

अंत में मेरी सलाह:
पीएचडी एक तपस्या है, इसमें सिर्फ डिग्री मायने नहीं रखती, बल्कि आपका रिसर्च वर्क मायने रखता है। अगर आपकी यूनिवर्सिटी यूजीसी की गाइडलाइंस का पालन कर रही है, तो आप बेफिक्र होकर एडमिशन ले सकते हैं। लेकिन अगर कहीं भी 'मैनेजमेंट कोटे' या 'बिना एग्जाम' की बात हो रही है, तो वहां से तुरंत दूरी बना लें। आपकी सालों की मेहनत और लाखों रुपये दांव पर हैं