रमजान से पहले शांति संदेश सऊदी की मध्यस्थता के बाद तालिबान ने छोड़े 3 पाकिस्तानी सैनिक, जानिए क्या है पूरा विवाद
News India Live, Digital Desk: दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी मुल्कों, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी तल्खी के बीच एक सकारात्मक मोड़ आया है। तालिबान प्रशासन ने मंगलवार (18 फरवरी, 2026) को घोषणा की कि उन्होंने अक्टूबर 2025 में सीमा संघर्ष के दौरान पकड़े गए 3 पाकिस्तानी सैनिकों को रिहा कर दिया है। यह कदम पवित्र महीने रमजान की शुरुआत से ठीक पहले उठाया गया है, जिसे एक मानवीय और कूटनीतिक जीत माना जा रहा है।
सऊदी अरब की 'बड़ी भूमिका'
तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि इन सैनिकों की रिहाई सऊदी अरब के एक विशेष प्रतिनिधिमंडल की अपील पर की गई है।
मुजाहिद के अनुसार, सऊदी अरब के साथ 'भाईचारे वाले' संबंधों और रमजान के पवित्र महीने के सम्मान में यह फैसला लिया गया।
रिहा किए गए सैनिकों को काबुल आए सऊदी प्रतिनिधिमंडल को सौंप दिया गया है।
कब और कैसे पकड़े गए थे सैनिक?
इन तीनों सैनिकों को 12 अक्टूबर, 2025 को दोनों देशों के बीच हुई हिंसक सीमा झड़प के दौरान बंदी बनाया गया था। वह समय अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच हाल के वर्षों का सबसे तनावपूर्ण दौर था, जब दोनों तरफ से भारी गोलीबारी और हवाई हमले हुए थे। पाकिस्तान ने तालिबान पर टीटीपी (TTP) जैसे आतंकियों को पनाह देने का आरोप लगाया था, जबकि काबुल ने पाकिस्तानी हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया था।
रिहाई के पीछे के सियासी मायने
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिहाई केवल एक मानवीय कदम नहीं, बल्कि सऊदी अरब की बढ़ती मध्यस्थता का परिणाम है।
सीमा तनाव में कमी: इस कदम से 2,600 किमी लंबी डूरंड रेखा पर जारी तनाव कम होने की उम्मीद है।
व्यापार की बहाली: पिछले कुछ महीनों में सीमा बंद होने के कारण दोनों देशों को करोड़ों डॉलर का व्यापारिक नुकसान हुआ है। सैनिकों की रिहाई से बॉर्डर क्रॉसिंग (जैसे तोरखम) पर शांति बहाल हो सकती है।
सऊदी का कद: यह वैश्विक स्तर पर सऊदी अरब की 'शांतिदूत' की भूमिका को और मजबूत करता है।