PCS Alankar Agnihotri : इस्तीफा दे रहे थे, अब सस्पेंड हो गए उन्नाव के सिटी मजिस्ट्रेट से आखिर कहां हो गई चूक?

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News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में इन दिनों एक PCS अफसर की कहानी खूब चर्चा में है। ये अफसर हैं उन्नाव के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री, जिन्हें हाल ही में सस्पेंड कर दिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि ये वही अफसर हैं जो कुछ समय पहले अपनी पोस्टिंग से नाखुश होकर नौकरी से इस्तीफा देना चाहते थे, लेकिन सरकार ने उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया था।

तो अब सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि जो अफसर खुद नौकरी छोड़ना चाहता था, उसे सरकार ने सस्पेंड कर दिया? चलिए, इस पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं।

एक चिट्ठी, जो सीधे भेज दी... और यही बन गई मुसीबत

मामला एक छोटी सी लेकिन बेहद गंभीर प्रशासनिक गलती से जुड़ा है। दरअसल, हाईकोर्ट ने एक मामले में रिपोर्ट मांगी थी। यह मामला उन्नाव के एक वकील द्वारा कथित तौर पर अवैध कब्जे से जुड़ा था। सिटी मजिस्ट्रेट होने के नाते अलंकार अग्निहोत्री ने इस पर एक रिपोर्ट तैयार की।

यहां तक तो सब ठीक था। लेकिन चूक इसके बाद हुई। सरकारी काम में एक तय प्रक्रिया होती है, जिसे 'प्रॉपर चैनल' कहते हैं। यानी कोई भी रिपोर्ट या फाइल अपने से बड़े अधिकारी के जरिए ही आगे भेजी जाती है। अलंकार अग्निहोत्री ने यह रिपोर्ट सीधे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को भेज दी, जबकि नियम यह कहता है कि उन्हें इसे अपने सीनियर अधिकारी, यानी जिलाधिकारी (DM) के जरिए भेजना चाहिए था।

इसे 'अनुशासनहीनता' क्यों माना गया?

प्रशासनिक दुनिया में अपने बॉस या सीनियर को बाइपास करके सीधे ऊपर रिपोर्ट भेजना एक बड़ी गलती मानी जाती है। इसे नियमों का उल्लंघन और अनुशासनहीनता के तौर पर देखा जाता है। सरकार ने उनके इस कदम को सरकारी सेवा नियमों के खिलाफ एक बड़ी अनुशासनहीनता माना और तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। उन्हें लखनऊ में राजस्व परिषद से अटैच किया गया है।

पहले भी चर्चा में थे अलंकार अग्निहोत्री

यह पहली बार नहीं है जब अलंकार अग्निहोत्री चर्चा में आए हैं। इससे पहले जब उनका ट्रांसफर कुशीनगर से उन्नाव में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर हुआ था, तो वह इस पोस्टिंग से खुश नहीं थे। उन्होंने अपनी नाराज़गी जताते हुए PCS की नौकरी से ही इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, बाद में सरकार ने उनके इस्तीफे को नामंजूर कर दिया था।

अब एक बार फिर वह गलत कारणों से सुर्खियों में हैं। पहले नौकरी छोड़ना चाही, और अब एक प्रक्रियात्मक गलती ने उन्हें सस्पेंड करवा दिया। यह मामला उन सभी अधिकारियों के लिए एक सबक है कि सिस्टम में नियमों का पालन करना कितना ज़रूरी होता है, चाहे आपकी मंशा सही ही क्यों न हो।