यूपी और बंगाल का गुप्त गठजोड़, अखिलेश-ममता की मुलाकात के बाद राहुल गांधी के लिए आया यह कड़ा संदेश
News India Live, Digital Desk: 2024 के चुनावों से पहले, विपक्ष की एकता की कहानी में आए दिन नए मोड़ आ रहे हैं। इस बार समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (जिन्हें 'दीदी' कहा जाता है) की मुलाकात ने कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने विपक्षी गठबंधन 'INDIA' के भीतर खलबली मचा दी है।
अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से ऐलान किया है कि सिर्फ ममता बनर्जी (Only Mamata Banerjee) ही देश भर में बीजेपी के हमले (Onslaught) को सफलतापूर्वक काउंटर (Counter) कर सकती हैं।
आखिर इस बयान का मतलब क्या है और कांग्रेस क्यों डरी है?
अखिलेश यादव के इस बयान में सीधा राजनीतिक संदेश छिपा है और यह कांग्रेस, ख़ासकर राहुल गांधी के नेतृत्व पर बड़ा सवाल उठाता है:
- गठबंधन से बढ़ती दूरी: यह बयान ऐसे समय आया है जब समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच उत्तर प्रदेश में सीट शेयरिंग को लेकर पहले से ही तनाव चल रहा है। अखिलेश के इस बयान ने संकेत दे दिया है कि वह बीजेपी विरोधी फ्रंट पर अपनी दोस्ती केवल उन पार्टियों तक सीमित रखेंगे, जो कांग्रेस से कमज़ोर नहीं पड़ती हैं।
- बंगाल और यूपी का गठजोड़: अखिलेश ने बीजेपी को हराने के लिए बंगाल और उत्तर प्रदेश में ममता बनर्जी की तरह आक्रामक, ज़मीनी रणनीति अपनाने का इशारा दिया है। वह एक ऐसा नॉन-कांग्रेस, गैर-हिंदी भाषी नेतृत्व चाहते हैं जो पूरे देश में बीजेपी को चुनौती दे सके।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अखिलेश ने ममता बनर्जी को 'BOSS' बनाकर, एक तरह से 'इंडिया' गठबंधन में मौजूद क्षेत्रीय नेताओं की आवाज़ को बुलंद किया है। इससे साफ ज़ाहिर है कि अगर बीजेपी के खिलाफ विपक्षी दल एकजुट होना चाहते हैं, तो उन्हें पहले कांग्रेस को छोड़कर आपस में बेहतर तालमेल बिठाना होगा। यह राजनीतिक जुगलबंदी अब कांग्रेस के लिए गंभीर सिरदर्द बन चुकी है।