Pauranik Katha : जब शेषनाग ने अधर्म के विरुद्ध अपनी ही माता का कर दिया था त्याग, जानें उनके 4 शक्तिशाली अवतारों का रहस्य
News India Live, Digital Desk: पौराणिक कथाओं में शेषनाग का स्थान अत्यंत पूजनीय और रहस्यमयी है। वे न केवल सर्पों के राजा हैं, बल्कि भगवान विष्णु के अनन्य भक्त और उनके विश्राम का आधार (शैया) भी हैं। 'अनंत' के नाम से प्रसिद्ध शेषनाग के हजार मस्तक ब्रह्मांड की अनंतता के प्रतीक माने जाते हैं। मान्यता है कि शेषनाग के हिलने से पृथ्वी पर भूकंप आते हैं और जब वे सीधे चलते हैं, तो समय का चक्र गतिमान रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अत्यंत शांत और धर्मपरायण स्वभाव के शेषनाग ने एक समय में अपनी सगी माता और भाइयों का त्याग कर दिया था?
क्यों किया शेषनाग ने अपनी माता कद्रू का त्याग?
महाभारत और अन्य पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, महर्षि कश्यप की दो पत्नियां थीं— कद्रू और विनता। कद्रू ने हजार नाग पुत्रों को जन्म दिया, जिनमें शेषनाग सबसे ज्येष्ठ थे। वहीं विनता से गरुड़ का जन्म हुआ। एक बार कद्रू ने छल (धोखे) से अपनी ही बहन विनता को एक शर्त में हरा दिया और उसे अपनी दासी बना लिया।
शेषनाग स्वभाव से अत्यंत धार्मिक थे। जब उन्होंने देखा कि उनकी माता कद्रू और उनके भाई (वासुकी, तक्षक आदि) अपनी ही मौसी विनता के साथ अन्याय और क्रूरता कर रहे हैं, तो उनका मन ग्लानि से भर गया। उन्होंने अपने भाइयों को अधर्म के मार्ग से रोकने की कोशिश की, लेकिन जब वे नहीं माने, तो शेषनाग ने अधर्म का साथ देने के बजाय अपनी माता और भाइयों का पूर्णतः त्याग कर दिया। वे घर छोड़कर गंधमादन पर्वत पर चले गए और वहां ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या में लीन हो गए। उनकी धर्मपरायणता से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उन्हें पृथ्वी का भार अपने सिर पर धारण करने की शक्ति प्रदान की।
युग-युगांतर में शेषनाग के 4 प्रमुख अवतार
भगवान विष्णु के साथ शेषनाग का संबंध इतना अटूट है कि वे हर युग में प्रभु की सेवा के लिए अवतार लेते हैं। आइए जानते हैं उनके 4 प्रमुख अवतारों के बारे में:
लक्ष्मण (त्रेतायुग): भगवान राम के अवतार के समय शेषनाग ने उनके छोटे भाई लक्ष्मण के रूप में जन्म लिया। उन्होंने वनवास के दौरान एक पल के लिए भी अपनी आंखें नहीं झपकाईं (निद्रा पर विजय पाकर) ताकि वे प्रभु राम और माता सीता की सेवा कर सकें।
बलराम (द्वापरयुग): श्रीकृष्ण अवतार के समय शेषनाग उनके बड़े भाई बलराम (दाऊजी) के रूप में प्रकट हुए। भगवान कृष्ण जब यमुना पार कर गोकुल जा रहे थे, तब मूसलाधार बारिश से बचाने के लिए शेषनाग ने ही उनके ऊपर अपने फन का छत्र तान दिया था।
महर्षि पतंजलि (कलियुग): योग सूत्र के प्रणेता और योग विद्या को दुनिया तक पहुंचाने वाले महर्षि पतंजलि को भी शेषनाग का ही अंश माना जाता है।
रामानुजाचार्य: दक्षिण भारत के महान संत और दार्शनिक रामानुजाचार्य को भी कलियुग में शेषनाग का अवतार माना गया है, जिन्होंने भक्ति आंदोलन के जरिए समाज में समरसता फैलाई।
सृष्टि का आधार हैं शेषनाग
पुराणों के अनुसार, शेषनाग ब्रह्मांड के संतुलन को बनाए रखते हैं। जब भगवान विष्णु योग निद्रा में होते हैं, तब शेषनाग ही उनकी सुरक्षा और आराम का ध्यान रखते हैं। उनकी पत्नी नागालक्ष्मी ने भी हर अवतार में उनकी सहचरी बनकर (जैसे बलराम की पत्नी रेवती) उनका साथ निभाया। शेषनाग की कथा हमें सिखाती है कि धर्म और न्याय की रक्षा के लिए यदि परिवार का भी त्याग करना पड़े, तो वह श्रेष्ठ है।