Patna PMCH : बिहार में आज से स्वास्थ्य सेवाएं हो सकती हैं ठप! अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर गए जूनियर डॉक्टर
News India Live, Digital Desk: बिहार में आज यानी मंगलवार से स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बड़ा संकट मंडराने लगा है। राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर अपनी कई सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इस हड़ताल का सीधा असर पटना के PMCH, NMCH से लेकर दरभंगा के DMCH और राज्य के अन्य सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की OPD और सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ना तय है।
अगर आप भी आज इलाज के लिए सरकारी अस्पताल जाने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है।
क्यों हड़ताल पर हैं 'अस्पताल की रीढ़' कहे जाने वाले ये डॉक्टर?
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) के बैनर तले हो रही इस हड़ताल के पीछे डॉक्टरों की लंबे समय से लंबित मांगें हैं, जिन पर सरकार का ध्यान नहीं दिए जाने से उनमें भारी नाराजगी है। JDA का कहना है कि वे पिछले 6 महीनों से लगातार सरकार से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों को अनसुना किया जा रहा है, जिसके बाद मजबूरन उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
जूनियर डॉक्टरों की मुख्य मांगें क्या हैं?
- सुरक्षा की गारंटी: अस्पतालों में डॉक्टरों के साथ आए दिन होने वाली मारपीट और दुर्व्यवहार की घटनाओं को लेकर वे अपनी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि अस्पतालों में एक सुरक्षित माहौल बनाया जाए।
- बेहतर हॉस्टल सुविधाएं: कई मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों के रहने के लिए हॉस्टल की हालत बहुत खराब है। वे साफ-सुथरे और बेहतर आवासीय सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।
क्या-क्या सेवाएं होंगी प्रभावित?
JDA ने साफ किया है कि फिलहाल वे आपातकालीन सेवाओं (Emergency Services) को इस हड़ताल से मुक्त रखेंगे, ताकि गंभीर मरीजों को कोई परेशानी न हो।
लेकिन, हड़ताल की वजह से इन सेवाओं पर सीधा असर पड़ेगा:
- वार्डों में भर्ती मरीज: वार्डों में भर्ती मरीजों की देखभाल का काम प्रभावित होगा।
- सामान्य ऑपरेशन: पहले से तय किए गए सामान्य ऑपरेशन टाले जा सकते हैं।
जूनियर डॉक्टरों को किसी भी मेडिकल कॉलेज अस्पताल की 'रीढ़ की हड्डी' माना जाता है। OPD से लेकर इमरजेंसी और वार्ड तक, मरीजों के इलाज का ज्यादातर बोझ उन्हीं के कंधों पर होता है। ऐसे में उनकी हड़ताल पर जाने से पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था का चरमराना लगभग तय है।
अब देखना यह है कि सरकार डॉक्टरों की इन मांगों पर कितनी जल्दी और क्या फैसला लेती है, क्योंकि जब तक कोई समाधान नहीं निकलता, इसका खामियाजा राज्य के हजारों गरीब और आम मरीजों को भुगतना पड़ेगा।