Jharkhand High Court : 25 साल पुरानी नियुक्तियों में दखल से हाईकोर्ट का इनकार ,कोर्ट ने कहा-देरी से आने वालों को राहत नहीं

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News India Live, Digital Desk: झारखंड उच्च न्यायालय ने 25 साल पहले हुई नियुक्तियों की वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि जो नियुक्तियां ढाई दशक पहले पूरी हो चुकी हैं और जिन पर कर्मचारी सालों से सेवा दे रहे हैं, उन्हें अब किसी भी आधार पर रद्द या परिवर्तित नहीं किया जा सकता।

क्या था मामला?

यह विवाद अविभाजित बिहार के समय (वर्ष 1999-2000) हुई कुछ सरकारी नियुक्तियों से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं ने इन नियुक्तियों की प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाते हुए इन्हें रद्द करने की मांग की थी।

याचिकाकर्ता का तर्क: नियुक्तियों में नियमों का उल्लंघन हुआ और पात्र उम्मीदवारों की जगह अन्य लोगों को चुना गया।

देरी का कारण: याचिकाकर्ताओं के पास इस बात का कोई संतोषजनक जवाब नहीं था कि वे 25 साल तक चुप क्यों रहे और अब इस मामले को क्यों उठा रहे हैं।

हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

न्यायमूर्ति की पीठ ने मामले को खारिज करते हुए कुछ कड़े कानूनी तर्क पेश किए:

Delay and Laches (देरी और सुस्ती): कोर्ट ने कहा कि न्याय केवल उन्हीं की मदद करता है जो अपने अधिकारों के प्रति सतर्क रहते हैं, न कि उनकी जो सालों तक सोते रहते हैं।

स्थिरता का सिद्धांत: 25 साल तक सेवा देने के बाद किसी कर्मचारी की नियुक्ति पर सवाल उठाना न केवल उनके साथ अन्याय होगा, बल्कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था में भी अस्थिरता पैदा होगी।

अधिकारों की सीमा: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रशासनिक निर्णय को चुनौती देने की एक उचित समय सीमा होती है। दशकों बाद ऐसी याचिकाओं को स्वीकार करना न्यायिक समय की बर्बादी है।

विवादित नियुक्तियों का इतिहास

झारखंड और बिहार में 90 के दशक के अंत में हुई कई नियुक्तियां अक्सर अदालती कार्यवाही का हिस्सा बनती रही हैं। विशेष रूप से शिक्षक भर्ती और लिपिक संवर्ग (Clerical Cadre) की भर्तियों में कई बार धांधली के आरोप लगे, लेकिन हाईकोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए एक नजीर (Precedent) बनेगा जो पुरानी नियुक्तियों को दोबारा खुलवाना चाहते हैं।