Parliament Ruckus : जब अपनी ही आवाज नहीं सुन पाए थरूर, तो गुस्से में दे दी ये बड़ी नसीहत
News India Live, Digital Desk: अक्सर हम देखते हैं कि जब संसद (Parliament) का सत्र चलता है, तो वहां बहस कम और शोर-शराबा (Ruckus) ज्यादा होता है। विपक्ष का काम है सरकार को घेरना, लेकिन घेरने के चक्कर में कई बार संसद 'मछली बाजार' बन जाती है।
आज (5 दिसंबर) संसद में कुछ ऐसा हुआ जिसने सबका ध्यान खींचा। कांग्रेस के सीनियर नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) अपनी विद्वता और अंग्रेजी के लिए जाने जाते हैं। लेकिन आज वो चर्चा में हैं अपने ही साथियों को 'पाठ पढ़ाने' के लिए।
आखिर हुआ क्या?
संसद का शीतकालीन सत्र (Winter Session) चल रहा है। लोकसभा में विपक्षी सांसद (खासकर कांग्रेस के सदस्य) किसी मुद्दे पर सरकार का विरोध कर रहे थे। वे जोर-जोर से नारे लगा रहे थे और वेल (Well) में आकर हंगामा कर रहे थे।
शोर इतना ज्यादा था कि किसी की बात सुनाई नहीं दे रही थी।
यह सब देखकर शशि थरूर का सब्र जवाब दे गया। उन्होंने एक ऐसी बात कही जो शायद विपक्ष के कई नेताओं को चुभ गई होगी, लेकिन लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी थी।
थरूर ने क्या कहा?
शशि थरूर ने साफ शब्दों में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा: हम संसद में नारे लगाने या चिल्लाने के लिए नहीं आए हैं। हमें यहां मुद्दों पर चर्चा करने और बहस (Debate) करने के लिए भेजा गया है। यही हमारा काम है।"
उनका इशारा साफ था अगर हम सिर्फ शोर मचाएंगे, तो जनता के मुद्दे कब उठाएंगे? थरूर ने कहा कि वे चर्चा करना चाहते हैं, लेकिन खुद उनकी पार्टी और विपक्ष का हंगामा इसमें बाधा बन रहा है। उनका यह बयान बताता है कि विरोध करना जरूरी है, लेकिन संसद की गरिमा गिराकर नहीं।
सोशल मीडिया पर तारीफ
थरूर का यह स्टैंड सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। लोग कह रहे हैं कि काश बाकी नेता भी ऐसा ही सोचते। जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनकर इसलिए भेजती है ताकि वे वहां उनकी समस्याओं का हल निकालें, न कि पोस्टर लहराएं।
क्या कांग्रेस सीख लेगी?
शशि थरूर अक्सर 'लीक से हटकर' बात करने के लिए जाने जाते हैं। कभी-कभी वे अपनी ही पार्टी की लाइन से अलग नजर आते हैं, लेकिन उनकी बातें लॉजिकल होती हैं। अब देखना होगा कि उनकी इस 'क्लास' का बाकी सांसदों पर कोई असर होता है या फिर कल से वही 'शोर-शराबा' जारी रहेगा?