पराली का धुआँ, किसानों पर FIR! पंजाब में सरकार का एक्शन शुरू, अब क्या होगा?

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पंजाब में जैसे ही धान की कटाई का मौसम शुरू हुआ है, वैसे ही एक बार फिर पराली (stubble) जलाने की समस्या सामने आ गई है। हर साल ठंड के मौसम में दिल्ली-NCR और उत्तर भारत के कई शहर इसी पराली के धुएँ से परेशान रहते हैं। लेकिन इस बार पंजाब की सरकार मामले को लेकर काफ़ी सख़्त नज़र आ रही है।

ताज़ा ख़बरों के मुताबिक़, पंजाब में पराली जलाने वाले किसानों के ख़िलाफ़ अब सीधी कार्रवाई शुरू हो गई है। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड (Pollution Control Board) ने अब तक 12 किसानों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करवा दी है।

सरकार हुई सख़्त, काटे जा रहे चालान

इस कार्रवाई से पता चलता है कि इस बार सरकार सिर्फ़ चेतावनी देकर चुप नहीं बैठने वाली है। पराली जलाने वाले किसानों पर एफआईआर दर्ज करने के साथ-साथ भारी जुर्माना भी लगाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार:

  • अब तक पराली जलाने की 650 से ज़्यादा घटनाएँ सैटेलाइट के ज़रिए दर्ज की जा चुकी हैं।
  • इन मामलों में, किसानों पर 10 लाख रुपये से भी ज़्यादा का जुर्माना लगाया जा चुका है।

हालांकि, किसानों ने अभी तक जुर्माने की रक़म जमा नहीं करवाई है, जिससे सरकार और किसानों के बीच टकराव की स्थिति बनती दिख रही ਹੈ।

क्यों जलानी पड़ती ਹੈ किसानों को पराली?

इस मुद्दे का एक और पहलू किसानों की मजबूरी है। किसानों का कहना है कि धान की कटाई और अगली फसल (गेहूँ) की बुवाई के बीच उन्हें बहुत कम समय मिलता है। इसलिए, खेतों को जल्दी तैयार करने का सबसे सस्ता और तेज़ तरीका पराली में आग लगाना है। खेत से पराली हटाने और उसका प्रबंधन करने वाली मशीनें काफी महंगी हैं, जिन्हें हर किसान वहन नहीं कर सकता।

आगे क्या होगा?

एक तरफ प्रदूषण की गंभीर समस्या है, जो लाखों लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी है, तो दूसरी तरफ किसानों की आर्थिक मजबूरी भी है। सरकार की सख्ती और किसानों पर एफआईआर इस मामले को और गरमा सकती है। किसानों का कहना है कि सरकार उन्हें कोई ठोस समाधान या आर्थिक मदद दे, सिर्फ़ कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा।

अब देखना यह है कि क्या सरकार की यह सख्ती पराली जलाने पर रोक लगा पाती है या यह मुद्दा एक और बड़े किसान आंदोलन का कारण बनता है।