Panchang 24 March : चैत्र नवरात्रि का छठा दिन, जानें आज का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और मां कात्यायनी की पूजा का समय
News India Live, Digital Desk: आज मंगलवार, 24 मार्च 2026 है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, आज चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। चैत्र नवरात्रि का आज छठा दिन है, जो आदि शक्ति के छठे स्वरूप 'मां कात्यायनी' को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र में मंगलवार का दिन और नवरात्रि की षष्ठी का संयोग अत्यंत मंगलकारी माना गया है। आज के दिन मां कात्यायनी की पूजा करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। यदि आप आज कोई शुभ कार्य करने जा रहे हैं, तो पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय जान लेना बेहद जरूरी है।
आज की तिथि और नक्षत्र का गणित
आज षष्ठी तिथि शाम 05:32 बजे तक रहेगी, जिसके बाद सप्तमी तिथि का आरंभ हो जाएगा। नक्षत्र की बात करें तो आज रोहिणी नक्षत्र दोपहर 01:15 बजे तक है, इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र शुरू होगा। रोहिणी को नक्षत्रों का राजा माना जाता है और इसमें किए गए कार्य स्थायित्व प्रदान करते हैं। चंद्रमा आज वृषभ राशि में विराजमान रहेंगे, जो मानसिक शांति और भौतिक सुखों के लिए शुभ संकेत है।
मां कात्यायनी की पूजा का शुभ मुहूर्त
आज मां कात्यायनी की उपासना के लिए कई शुभ योग बन रहे हैं। ज्योतिषविदों के अनुसार, आज 'प्रीति योग' और 'आयुष्मान योग' का सुंदर मेल है।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक (किसी भी शुभ कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ समय)।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:12 बजे से 03:00 बजे तक।
अमृत काल: सुबह 10:10 बजे से 11:45 बजे तक।
सावधान! आज इस समय न करें कोई शुभ कार्य (राहुकाल)
पंचांग के अनुसार, प्रत्येक दिन एक निश्चित समय ऐसा होता है जब राहु का प्रभाव अधिक रहता है। इस दौरान किए गए शुभ कार्यों में बाधा आने की आशंका रहती है।
राहुकाल: दोपहर 03:22 बजे से शाम 04:53 बजे तक।
यमगण्ड: सुबह 09:18 बजे से 10:49 बजे तक।
गुलिक काल: दोपहर 12:20 बजे से 01:51 बजे तक।
आज का विशेष उपाय: विवाह बाधा होगी दूर
मां कात्यायनी को 'ब्रज की अधिष्ठात्री देवी' माना जाता है। आज के दिन कन्याओं को पीले वस्त्र धारण कर मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाना चाहिए। मान्यता है कि इससे सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है और दांपत्य जीवन में मधुरता आती है। चूंकि आज मंगलवार भी है, इसलिए शाम के समय हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाना और सुंदरकांड का पाठ करना विशेष फलदायी रहेगा।