सिर्फ व्यापार नहीं, अब दोस्ती पर भी पहरा? जानिए अमेरिका क्यों चाहता है कि वेनेजुएला इन 4 देशों का साथ छोड़ दे

Post

News India Live, Digital Desk: दुनिया की राजनीति में आजकल 'दोस्ती' और 'दुश्मनी' की परिभाषाएँ बड़ी तेजी से बदल रही हैं। अक्सर हम सुनते हैं कि किसी देश ने दूसरे पर पाबंदी लगा दी, लेकिन क्या कभी ऐसा सुना है कि कोई सुपरपावर (Superpower) किसी छोटे देश को ये बताए कि उसे किससे बात करनी चाहिए और किससे नहीं?

ताज़ा मामला कुछ ऐसा ही है। अमेरिका ने दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला को एक कड़ी चेतावनी जारी की है। अमेरिका ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर वेनेजुएला को ग्लोबल मंच पर शांति से रहना है, तो उसे चार खास देशों से अपने रिश्ते पूरी तरह खत्म करने होंगे। दिलचस्प बात ये है कि इन 4 देशों में से एक भारत का बेहद पुराना और सबसे भरोसेमंद दोस्त भी शामिल है हम बात कर रहे हैं रूस की।

किन 4 देशों पर है अमेरिका की नज़र?
अमेरिका ने वेनेजुएला के सामने जिन देशों से किनारा करने की शर्त रखी है, उनमें रूस, चीन, ईरान और क्यूबा शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि वेनेजुएला को अपनी विदेशी नीति बदलनी होगी और इन देशों के साथ मिलकर अपनी सैन्य या व्यापारिक रणनीतियाँ बनाना बंद करना होगा।

भारत के दोस्त का ज़िक्र यहाँ क्यों?
भारत और रूस के बीच जो रिश्ता है, वो सालों पुराना है। मुश्किल वक्त में रूस हमेशा भारत के साथ खड़ा रहा है। ऐसे में जब अमेरिका, रूस जैसे देश से नाता तोड़ने का दबाव किसी अन्य देश पर डालता है, तो इसका असर कहीं न कहीं दुनिया भर की कूटनीति पर पड़ता है। वेनेजुएला के लिए रूस सिर्फ एक सहयोगी नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त का साथी रहा है, जो उसे अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद तेल के बाजार में खड़े रहने में मदद करता है।

आखिर अमेरिका ऐसा क्यों कर रहा है?
देखा जाए तो अमेरिका अपनी 'बैकयार्ड' (Backyard) यानी दक्षिण अमेरिका में किसी भी बाहरी विरोधी ताकत का दखल नहीं चाहता। उसे लगता है कि अगर रूस और चीन जैसे देश वेनेजुएला के करीब आए, तो यह अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। इसीलिए अमेरिका अब वेनेजुएला की सरकार पर दबाव बढ़ा रहा है ताकि वह अपनी इन दोस्ती की जंजीरों को तोड़ दे।

अब क्या होगा आगे?
वेनेजुएला पहले से ही गरीबी और महंगाई की मार झेल रहा है। अब उसके सामने 'कुआं और खाई' वाली स्थिति है। एक तरफ अमेरिका की कड़क शर्तें हैं, जिन्हें न मानने पर और ज्यादा पाबंदियां लग सकती हैं। दूसरी तरफ रूस और चीन जैसे बड़े मददगार हैं, जिन्होंने हर बुरे वक्त में वेनेजुएला का साथ दिया है।

यह सिर्फ दो देशों का झगड़ा नहीं है, बल्कि दुनिया की सुपरपावर के दबदबे की लड़ाई है। क्या वेनेजुएला अमेरिका की बात मानेगा या रूस और चीन के साथ खड़ा रहेगा? यह आने वाले कुछ महीने तय करेंगे।

आपको क्या लगता है? क्या अमेरिका का दूसरे देशों के रिश्तों में इस तरह दखल देना सही है? कमेंट्स में अपनी राय जरूर लिखें।