अमेरिका का एनर्जी गेम चेंजर ,महंगे पेट्रोल की छुट्टी करने के लिए ट्रम्प ने हाथ मिलाया अपनी सबसे बड़ी विरोधी सरकार से
News India Live, Digital Desk: जब बात फायदे के सौदे की हो, तो डोनाल्ड ट्रम्प के फैसलों से पूरी दुनिया चौंक जाती है। कल तक जिस वेनेजुएला पर अमेरिका ने अनगिनत पाबंदियां लगाई थीं, अब उसी देश से करोड़ों बैरल कच्चा तेल लाने की तैयारी चल रही है। डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में साफ कर दिया कि अमेरिका अब वेनेजुएला से करीब 3 करोड़ से लेकर 5 करोड़ बैरल तक तेल लेगा।
अब आप सोच रहे होंगे कि अचानक ऐसा क्या हो गया? दरअसल, ट्रम्प का मानना है कि अमेरिका को किसी एक या दो देशों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी ऊर्जा की जरूरतों को सुरक्षित करना चाहिए, भले ही उसके लिए किसी भी दरवाजे को खटखटाना पड़े।
अमेरिका को इतने तेल की जरूरत क्यों है?
आज की दुनिया में जिसके पास तेल है, बाजार उसी का होता है। ट्रम्प का मुख्य लक्ष्य अमेरिका में महंगाई को कम करना है। जब अमेरिका जैसे बड़े देश के पास अपना बड़ा तेल भंडार (Strategic Reserve) भरा होगा, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें गिरेंगी और आम अमेरिकियों के लिए पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा। इस बार उन्होंने वेनेजुएला के भारी तेल भंडारों पर नजर टिकाई है, जो दुनिया में सबसे बड़े माने जाते हैं।
एक बिजनेस डीलर की तरह ट्रम्प की रणनीति
डोनाल्ड ट्रम्प ने कभी भी यह नहीं छिपाया कि वह हर मुद्दे को एक 'बिजनेसमैन' की तरह देखते हैं। जहाँ पिछली सरकारें कूटनीति और पाबंदियों के बीच उलझी रही थीं, वहीं ट्रम्प अब इस सोच के साथ बढ़ रहे हैं कि अगर वेनेजुएला हमें सस्ता तेल देता है, तो उससे फायदा आखिर किसका है? उनके इस बयान ने तेल बाजार के जानकारों के बीच एक बहस छेड़ दी है—कि क्या अब पाबंदियों का दौर खत्म होने वाला है?
रूस और चीन के लिए क्या संदेश है?
वेनेजुएला में अभी तक रूस और चीन का गहरा असर रहा है। अगर वेनेजुएला सीधे अमेरिका को इतना बड़ा भंडार देता है, तो इससे चीन का वर्चस्व वहां कम होगा। साथ ही, मिडिल-ईस्ट (अरब देशों) पर अमेरिका की निर्भरता भी घटेगी। एक तरफ जहाँ ट्रम्प ने वेनेजुएला को बाकी दोस्तों से दूर रहने को कहा है, वहीं दूसरी तरफ ये तेल की डील उसी दिशा में बढ़ता एक कदम दिखती है।
आम जनता के लिए इसका क्या मतलब है?
ये पूरी बातचीत हमें एक बड़ा सबक सिखाती है—कि इंटरनेशनल राजनीति में कोई परमानेंट दुश्मन नहीं होता, सब कुछ हितों का खेल है। अगर ये डील सफल होती है, तो हो सकता है आने वाले समय में दुनिया भर में तेल के दाम स्थिर हो जाएं, जिससे हर मध्यमवर्गीय इंसान की जेब पर पड़ने वाला बोझ कम हो जाए।
आपको क्या लगता है? क्या ट्रम्प का यह कदम मास्टरस्ट्रोक है या फिर वेनेजुएला पर भरोसा करना अमेरिका के लिए जोखिम भरा होगा? हमें अपनी राय जरूर बताएं।