सिर्फ फाइनल नहीं, इतिहास लिखने का मौका ,भारतीय महिला टीम अपने दंगल मोमेंट की तलाश में
News India Live, Digital Desk : जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम मैदान पर उतरती है, तो यह सिर्फ एक और मैच नहीं होता. यह उन लाखों लड़कियों के सपनों का प्रतिनिधित्व होता है, जिन्हें कभी कहा गया था कि क्रिकेट उनका खेल नहीं है. यह उस संघर्ष की कहानी है, जो धीमी गति से ही सही, लेकिन लगातार सफलता की नई इबारत लिख रही है. आज टीम इंडिया एक ऐसे ही मोड़ पर खड़ी है, जहां जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि इतिहास बदलने का जरिया बन सकती है—एक ऐसा पल जिसे हम सब अपना 'दंगल मोमेंट' कह सकें.
'दंगल मोमेंट' आखिर है क्या?
फिल्म 'दंगल' का वह क्लाइमैक्स सीन याद है आपको? जब गीता फोगाट आखिरी सेकंड में 5 पॉइंट का दांव लगाकर गोल्ड मेडल जीतती है. वह सिर्फ एक कुश्ती का मैच नहीं था, वह समाज की सोच पर एक युवा लड़की की जीत थी. वह एक ऐसा पल था जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया और महिला एथलीटों को देखने का नजरिया हमेशा के लिए बदल दिया. भारतीय महिला क्रिकेट टीम आज उसी एक पल की तलाश में है. एक ऐसी बड़ी खिताबी जीत, जो उन्हें 'अच्छा खेलने वाली टीम' के तमगे से निकालकर 'चैंपियन टीम' का दर्जा दिला दे.
वर्ल्ड कप फाइनल्स की अधूरी कहानियां
ऐसा नहीं है कि टीम इंडिया ने बड़े मौके नहीं देखे. 2005 और 2017 में हम 50 ओवर के वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचे, लेकिन ट्रॉफी हाथ नहीं आई. 2020 T20 वर्ल्ड कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न का वह खचाखच भरा मैदान आज भी याद है, जहां हम एकतरफा हार गए. 2023 के T20 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के ही खिलाफ हरमनप्रीत कौर का वह रन-आउट... मानो किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.
ये 'लगभग जीत' वाली कहानियां टीम की काबिलियत तो दिखाती हैं, लेकिन साथ ही एक कसक भी छोड़ जाती हैं. बार-बार फाइनल और सेमीफाइनल की बाधा पार न कर पाना एक मानसिक दीवार की तरह बन जाता है, जिसे तोड़ने के लिए एक बड़ी जीत की सख्त जरूरत है.
बदल रहा है महिला क्रिकेट का दौर
आज हालात पहले से बेहतर हैं. WPL (विमेंस प्रीमियर लीग) ने महिला क्रिकेट को एक नई पहचान दी है. खिलाड़ियों को पैसा, शोहरत और सबसे बढ़कर बड़े मैचों में दबाव झेलने का अनुभव मिल रहा है. स्मृति मंधाना, हरमनप्रीत कौर और शेफाली वर्मा जैसे नाम आज घर-घर में पहचाने जाते हैं. युवा खिलाड़ी जैसे ऋचा घोष और रेणुका सिंह ने दिखाया है कि टीम का भविष्य कितना उज्ज्वल है.
लेकिन इस चमक-दमक के बीच एक सच्चाई यह भी है कि हमारी टीम ने अब तक कोई बड़ी सीनियर ICC ट्रॉफी नहीं जीती है. यह एक ऐसी कमी है जिसे हर खिलाड़ी और हर फैन जल्द से जल्द पूरा करना चाहता है.
यह फाइनल सिर्फ 11 खिलाड़ियों का मैच नहीं, बल्कि भारतीय खेल जगत में एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकता है. यह वह 'दंगल मोमेंट' हो सकता है जो आने वाली पीढ़ी की हजारों लड़कियों को बल्ला उठाने के लिए प्रेरित करेगा. यह साबित करने का मौका है कि भारत की बेटियां भी दुनिया पर राज कर सकती हैं. अब बस इंतजार है उस एक आखिरी छलांग का, जो इतिहास की किताबों में हमेशा के लिए दर्ज हो जाए.