मणिपुर में फिर बढ़ी रार डिप्टी CM की मांग ने क्यों मचाया बवाल? कुकी विधायकों का बहिष्कार

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News India Live, Digital Desk: मणिपुर की राजनीति एक बार फिर सुलग उठी है। पिछले डेढ़ साल से जातीय हिंसा की आग में झुलस रहे इस पूर्वोत्तर राज्य में अब एक नए 'संवैधानिक पद' ने विवाद खड़ा कर दिया है। चर्चा है कि राज्य में दो 'डिप्टी सीएम' (उपमुख्यमंत्री) नियुक्त किए जा सकते हैं, लेकिन इस प्रस्ताव ने समाधान के बजाय एक नया गतिरोध पैदा कर दिया है।

क्या है पूरा विवाद?

सूत्रों के अनुसार, मणिपुर में शांति बहाली के प्रयासों के तहत केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक फॉर्मूले पर चर्चा हो रही है। इस फॉर्मूले में पहाड़ी (Hill) और घाटी (Valley) क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाने के लिए दो उपमुख्यमंत्री बनाने का विचार शामिल है।

हालांकि, कुकी समुदाय के विधायकों और संगठनों ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका तर्क है कि जब तक उनकी 'Separate Administration' (अलग प्रशासन) की मांग पूरी नहीं होती, तब तक ऐसे पदों का कोई औचित्य नहीं है।

कुकी विधायकों ने क्यों किया बहिष्कार?

कुकी-जो समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले 10 विधायकों (जिनमें भाजपा के विधायक भी शामिल हैं) ने स्पष्ट कर दिया है कि वे मणिपुर की मौजूदा सरकार के किसी भी प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा नहीं बनेंगे।

अविश्वास की खाई: विधायकों का कहना है कि घाटी में उनके लिए माहौल सुरक्षित नहीं है, ऐसे में वे इंफाल जाकर शपथ कैसे ले सकते हैं?

अधूरी मांगें: कुकी संगठनों का मानना है कि डिप्टी सीएम का पद केवल एक "दिखावा" है, जबकि वे पूर्ण राजनीतिक स्वायत्तता चाहते हैं।

बैठक से दूरी: हाल ही में दिल्ली में हुई महत्वपूर्ण चर्चाओं के दौरान भी कुकी प्रतिनिधियों ने इस प्रस्ताव पर असहमति जताई।

मैतेई समुदाय और सरकार का रुख

दूसरी ओर, मैतेई समुदाय और राज्य सरकार के समर्थक गुटों का मानना है कि दो डिप्टी सीएम (एक कुकी और एक नागा समुदाय से) बनाने से समुदायों के बीच प्रतिनिधित्व बढ़ेगा और तनाव कम होगा। लेकिन कुकी विधायकों के कड़े रुख ने मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह और केंद्र सरकार के सामने नई चुनौती पेश कर दी है।

आगे क्या होगा?

मणिपुर की स्थिति वर्तमान में "वेट एंड वॉच" वाली बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कुकी और मैतेई समुदायों के बीच जमीनी स्तर पर बातचीत शुरू नहीं होती, तब तक केवल पदों के बंटवारे से शांति लाना मुश्किल है।