Nobel Secrecy Rules : जानिए कैसे होता है उम्मीदवारों का चुनाव और क्यों सबकी निगाहें ट्रम्प पर हैं?

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News India Live, Digital Desk: Nobel Secrecy Rules : आपने ज़रूर नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) के बारे में सुना होगा, जो दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान माना जाता है. यह पुरस्कार ऐसे लोगों या संगठनों को मिलता है जिन्होंने शांति के लिए कुछ असाधारण काम किया हो. आजकल अक्सर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) के नाम को लेकर चर्चा होती है कि क्या उन्हें यह सम्मान मिल सकता है, ख़ासकर 2025 के लिए. आइए, समझते हैं कि इसकी क्या संभावनाएँ हैं और आख़िर यह पुरस्कार कैसे चुना जाता है.

ट्रम्प की उम्मीदें कम क्यों?

देखा जाए तो, डोनाल्ड ट्रम्प को इज़राइल और कुछ अरब देशों के बीच 'अब्राहम समझौते' (Abraham Accords) कराने का श्रेय दिया जाता है, जिसे शांति की दिशा में एक क़दम माना गया था. इसी वजह से कुछ लोगों ने उनके नाम का सुझाव भी दिया है. लेकिन, सच्चाई ये है कि नोबेल कमेटी के मानदंड बहुत व्यापक और गहरे होते हैं. पुरस्कार देने वाली संस्था सिर्फ़ किसी एक उपलब्धि पर नहीं रुकती, बल्कि उम्मीदवार के पूरे कार्यकाल, वैश्विक शांति में उनके योगदान के तरीक़े और विवादित बयानों या नीतियों को भी ध्यान में रखती है.

ट्रम्प के कार्यकाल के दौरान कुछ ऐसी घटनाएँ और बयान रहे हैं, जो उनकी उम्मीदवारी को कमज़ोर कर सकते हैं. नोबेल कमेटी अक्सर ऐसे व्यक्ति को चुनती है जिसने वास्तव में सद्भाव, कूटनीति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया हो, जबकि ट्रम्प के कार्यकाल में कुछ निर्णय और नीतियाँ ऐसी रहीं जिनकी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आलोचना भी हुई थी. यही वजह है कि उनकी संभावनाएँ अभी बहुत ज़्यादा नहीं लगतीं.

शांति पुरस्कार के विजेता कैसे चुने जाते हैं?

नोबेल शांति पुरस्कार का चयन एक बेहद व्यवस्थित और गोपनीय प्रक्रिया के तहत होता है, जिसे नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी (Norwegian Nobel Committee) अंजाम देती है. यह पूरी प्रक्रिया क़रीब एक साल तक चलती है:

  1. नामांकन: हर साल सितंबर के अंत तक दुनियाभर से नोबेल कमेटी को नामांकन मिलते हैं. कौन-कौन व्यक्ति या संस्था नामांकित हो सकती है, इसके लिए कुछ विशेष योग्यताएँ होती हैं. जैसे, अलग-अलग देशों की संसद के सदस्य, विश्वविद्यालयों के प्रोफ़ेसर, पूर्व शांति पुरस्कार विजेता और ख़ुद नोबेल कमेटी के सदस्य आदि इसमें नाम भेज सकते हैं. ख़ास बात यह है कि नॉमिनेशन सार्वजनिक नहीं किए जाते हैं और पाँच साल तक इन्हें गोपनीय रखा जाता है.
  2. छानबीन: जनवरी तक नामांकन की अंतिम तारीख़ होती है. इसके बाद, कमेटी प्राप्त सभी नामांकनों की बारीक़ी से छानबीन करती है. सैकड़ों नामों में से एक छोटी सूची बनाई जाती है.
  3. विशेषज्ञों की राय: कमेटी कुछ विशेष विशेषज्ञों की मदद लेती है जो शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करते हैं.
  4. विचार-विमर्श: वसंत ऋतु (Spring) से लेकर शरद ऋतु (Autumn) तक, कमेटी के सदस्य लगातार बैठकें करते हैं, रिपोर्ट्स पर चर्चा करते हैं और अपनी राय बनाते हैं. वे अलग-अलग दृष्टिकोणों से उम्मीदवारों के योगदान को आंकते हैं.
  5. अंतिम फ़ैसला: अक्तूबर की शुरुआत में, कमेटी सर्वसम्मति या बहुमत से अपना अंतिम फ़ैसला लेती है. यह फ़ैसला दुनिया के सामने तभी आता है जब पुरस्कार की घोषणा की जाती है.
  6. पुरस्कार समारोह: विजेता को दिसंबर में ओस्लो, नॉर्वे में एक भव्य समारोह में पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है, जहाँ उन्हें स्वर्ण पदक, डिप्लोमा और नकद राशि मिलती है.

इस प्रक्रिया से साफ़ होता है कि यह सिर्फ़ किसी एक समझौते तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थायी शांति के लिए एक व्यक्ति या संस्था के संपूर्ण योगदान को देखा जाता है. यही वजह है कि ट्रम्प जैसे राजनेताओं के लिए, जिनकी कार्यशैली पर काफ़ी बहस होती रही है, इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को जीतना आसान नहीं होगा.