Nitish Cabinet 2.0: क्या सम्राट चौधरी बनेंगे डिप्टी सीएम या विजय सिन्हा मारेंगे बाजी? भाजपा की मीटिंग से आई बड़ी खबर
News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति में नवंबर की ठंड के बीच भी गजब की गर्मी है। पटना के 1, पोलो रोड से लेकर बीजेपी कार्यालय तक गाड़ियों की कतारें लगी हैं और हर किसी के जुबान पर बस एक ही सवाल है— "आखिर बिहार बीजेपी का नया बॉस कौन होगा?"
आज पटना में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों की एक बेहद अहम बैठक हो रही है। यह बैठक कोई चाय-नाश्ते वाली नहीं है, बल्कि इसमें विधायक दल का नेता चुना जाना है। और हम सब जानते हैं कि बिहार के मौजूदा समीकरण में विधायक दल का नेता बनने का सीधा मतलब है— डिप्टी सीएम (Deputy CM) की कुर्सी का प्रबल दावेदार होना।
कौन-कौन है रेस में? (The Top Contenders)
पर्दे के पीछे की खबरों और सियासी गलियारों की सुगबुगाहट पर गौर करें, तो इस बार रेस बहुत दिलचस्प है। सुशील मोदी का दौर जाने के बाद बीजेपी अब नए और आक्रामक चेहरों पर दांव लगा रही है।
- सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary): ये नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। अपने आक्रामक तेवर और पगड़ी (जो उन्होंने नीतीश कुमार को हटाने तक न खोलने की कसम खाई थी, अब शायद समीकरण बदल रहे हैं) के लिए मशहूर हैं। 'लव-कुश' (कुर्मी-कोयरी) वोट बैंक को साधने के लिए बीजेपी उन पर बड़ा दांव खेल सकती है।
- विजय कुमार सिन्हा (Vijay Kumar Sinha): विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहते हुए इन्होंने अपनी धाक जमाई है। भूमिहार समाज से आने वाले विजय सिन्हा एक अनुशासित और तार्किक नेता माने जाते हैं। उनका अनुभव उन्हें डिप्टी सीएम की कुर्सी के करीब ले जाता है।
- मंगल पांडेय (Mangal Pandey): संगठन के आदमी माने जाते हैं और बीजेपी के पुराने और भरोसेमंद सिपाही हैं। पिछली सरकारों में भी स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर काम कर चुके हैं। इनका नाम भी जोर-शोर से चल रहा है।
इसके अलावा नितिन नवीन जैसे युवा चेहरों को भी अहम जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है।
पर्यवेक्षकों की पैनी नज़र
दिल्ली दरबार (केन्द्रीय नेतृत्व) कोई भी कच्चा दांव नहीं खेलना चाहता। इसलिए विधायकों की राय जानने और एक राय बनाने के लिए पर्यवेक्षकों को भेजा गया है। मकसद साफ़ है— 2025 के विधानसभा चुनाव के लिए एक मजबूत टीम खड़ी करना जो जातीय और सामाजिक समीकरणों में फिट बैठे।
कार्यकर्ताओं में उत्साह और धड़कनें दोनों तेज
बीजेपी ऑफिस के बाहर कार्यकर्ताओं का जमावड़ा है। हर गुट अपने नेता के लिए नारेबाजी कर रहा है। लेकिन बीजेपी की खासियत है कि वह अक्सर अपने फैसलों से चौंकाती है। कभी-कभी जो नाम सबसे आगे चलता है, वो पीछे रह जाता है और एक नया चेहरा (Dark Horse) सामने आ जाता है।
फिलहाल तो बंद कमरे में मंथन जारी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि जब दरवाज़ा खुलेगा, तो किसके माथे पर विजय का तिलक होगा और किसे नीतीश कैबिनेट में नंबर-2 की हैसियत मिलेगी।