निकोलस मदुरो केस और 92 वर्षीय जज अमेरिकी न्यायपालिका की वो अनोखी परंपरा जो दुनिया को चौंकाती है

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News India Live, Digital Desk : दुनियाभर में हर सरकारी नौकरी के लिए एक उम्र तय होती है चाहे वो 60 साल हो, 62 हो या 65। लेकिन जब हम अमेरिका की तरफ देखते हैं, तो वहां की तस्वीर पूरी तरह बदली हुई नजर आती है। अभी चर्चा हो रही है वेनेजुएला के नेता निकोलस मदुरो के मामले की, जिसकी सुनवाई की कमान एक 92 साल के अनुभवी जज के हाथों में है।

रिटायरमेंट की उम्र क्यों नहीं है?
दरअसल, अमेरिका में 'आर्टिकल III' (Article III) के तहत फेडरल जजों की नियुक्ति "जीवनभर" (Life Tenure) के लिए होती है। संविधान कहता है कि जज अपने पद पर तब तक बने रह सकते हैं जब तक उनका आचरण "अच्छा" (Good Behaviour) रहे। इसका सीधा सा मतलब है कि वहां जजों के लिए कोई रिटायरमेंट की निश्चित उम्र (जैसे 65 या 70 साल) नहीं है।

जब तक जज खुद अपनी मर्ज़ी से इस्तीफा न दे दे या उसके खिलाफ कोई गंभीर महाभियोग (Impeachment) न चलाया जाए, वो अपनी आखिरी सांस तक कुर्सी पर बैठा रह सकता है।

इसके पीछे की वजह क्या है?
इसके पीछे की सोच यह है कि जज किसी राजनीतिक दबाव में न आएं। जब जज को पता होता है कि उसे कोई नौकरी से नहीं हटा सकता और न ही रिटायर होने के बाद किसी दूसरी नौकरी की चिंता है, तो वह ज्यादा निडर होकर और निष्पक्ष तरीके से फैसले ले पाता है।

क्या यह सही है?
इस पर अमेरिका में काफी बहस भी होती है। कुछ लोग कहते हैं कि अनुभव का कोई मुकाबला नहीं होता—92 साल की उम्र का मतलब है दशकों का गहरा ज्ञान। वहीं दूसरी ओर, एक बड़ा तबका यह भी मानता है कि बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें और पुराने पड़ चुके विचार आधुनिक दुनिया के जटिल मामलों में समस्या बन सकते हैं।

फिलहाल, निकोलस मदुरो वाला मामला यह साबित करता है कि अमेरिकी सिस्टम अपनी इस सदियों पुरानी परंपरा पर आज भी कायम है। एक ऐसा मामला जिसका असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ेगा, उसकी कमान इतने बुजुर्ग हाथ में होना वाकई दिलचस्प और बहस का विषय है।